फिल्म कलाकारों के लिए पागलपन

फिल्म कलाकारों के लिए पागलपन - फिल्मों का हमारे जीवन से बहुत गहरा सम्बन्ध है। फिल्में समाज का आईना होती है जिनका समाज पर बहुत गहरा असर होता है। फिल्मों में जो कुछ दिखाया जाता है वह हमारे जीवन पर काफी कुछ असर डालता है जैसे अगर किसी फिल्मीं अभिनेता ने कोई नई हेयर स्टाइल रखी हो तो उसके प्रशंसक उसी तरीके से अपने बाल बनाने लग जाते हैं।

फिल्मों में अभिनेता और अभिनेत्री के पहनावे, चाल-ढाल, बात करने के तरीके, नृत्य, स्टंट, आदि का प्रशंसको पर बहुत असर होता है और वो इन बातों की बहुत नकल करते हैं।

कलाकारों के अपने अलग-अलग प्रशंसक होते हैं जिनका अपना एक दायरा होता है। प्रशंसक हर स्तर और हर उम्र के होते हैं लेकिन जुनून किशोरों और युवाओं में बहुत ज्यादा होता है। युवा वर्ग के प्रशंसक जुनून की हद तक इनकी अदाओं और कलाकारी को दोहराते हैं। ये प्रशंसक अपने पसंदीदा कलाकारों को भगवान के माफिक दर्जा देते हैं तथा कुछ तो उनकी पूजा भी करने लग जाते हैं। कुछ प्रशंसक तो इन पसंदीदा कलाकारों का मंदिर तक बना डालते हैं।

इन प्रशंसकों में एक अजीब तरह का जुनून होता है जो उन्हें किसी भी हद तक गुजरनें को प्रेरित करता है। बहुत से प्रशंसक अपने पसंदीदा फिल्मीं कलाकारों के नाम, उनकी फोटो, आदि अपने शरीर पर टेटू के रूप में उकेरा लेते हैं। ये प्रशंसक अपने शरीर को किसी भी तरह का कष्ट पहुँचाने से भी नहीं घबराते हैं।

अभिनेताओं के मारधाड़ वाले दृश्यों की नकल करने में कई बार प्रशंसक अपने आप को घायल भी कर लेते हैं फलस्वरूप कई बार इसकी परिणति मृत्यु भी हो सकती है। अति हर चीज की बहुत खतरनाक होती है तथा हमें यह समझना होगा कि फिल्मों में जो कुछ दिखाया जाता हैं वो पूरी तरह से सत्य नहीं होता है।

फिल्मों के निर्माण और संपादन में बहुत प्रकार की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इन तकनीकों की वजह से मानवीय क्षमताओं को बहुत अधिक बढ़ा चढ़ा कर दिखाया जा सकता है। अधिकतर फिल्मीं स्टंट दृश्य या तो कंप्यूटर जनित होते हैं या फिर उन्हें किसी स्टंट मैन पर फिल्माया जाता है जिसे बहुत से प्रशंसक असली समझ लेते हैं।

मनोरंजन के विभिन्न रूप है जिनमें फिल्में, खेलकूद, विडियो गेम, नृत्य, संगीत, नाटक, आदि प्रमुख है। इंसान के जीवन में मनोरंजन का अपना एक अलग महत्व है तथा वह जिस चीज को बहुत ज्यादा पसंद करता है उसमें वह अपने कुछ आदर्श बना लेता है। इन आदर्शों से प्रेरणा लेकर अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ा जा सकता है परन्तु जिस आदमीं को वह लक्ष्य नहीं पाना है अगर वह भी इन आदर्शों को जुनून की हद तक पूरा करने की कोशिश करे तो वह अपने प्राथमिक लक्ष्य से भटक सकता है।

विद्यार्थी का फिल्मीं कलाकारों के प्रति जुनून उसे उसके पढ़ाई के लक्ष्य से भटका सकता है। फिल्में सिर्फ और सिर्फ मनोरंजन के लिए होती हैं तथा इन्हें मनोरंजन के उद्देश्य से ही देखना चाहिए।

बेशक बहुत सी फिल्मों में कुछ अच्छे सन्देश भी होते हैं लेकिन ये हमें तय करना होगा कि क्या सही है और क्या गलत है। सही और गलत का विश्लेषण हमें हमारे दिमाग पर छोड़ देना चाहिए। हमें समझना होगा कि फिल्मीं कलाकार भी मात्र एक इंसान है और वे भी अपनी रोजी रोटी कमाने के लिए ही यह काम कर रहें हैं। जैसे जीविका के लिए विभिन्न पेशे हैं वैसे ही फिल्में भी कलाकारों के लिए एक पेशा है, एक व्यापार है।

हमें फिल्मीं चकाचौंध से अपने आप को बचाकर सबसे पहले अपने प्राथमिक लक्ष्य को प्राप्त करना चाहिए। यह प्राथमिक लक्ष्य कुछ भी हो सकता है जैसे विद्यार्थी के लिए पढ़ाई उसका प्राथमिक लक्ष्य होता है। किसी के प्रशंसक हम किसी भी उम्र में हो सकते हैं तथा इसके लिए किसी भी तरह की योग्यता की कोई आवश्यकता नहीं होती है परन्तु पढ़नें की एक उम्र होती है और यह उम्र गुजर जाने के पश्चात सिवाय अफसोस के कुछ भी नहीं होता।

प्रशंसक होना बुरी बात नहीं है परन्तु जुनून और दीवानापन बहुत नुकसानदायक है अतः हमें सिर्फ और सिर्फ मनोरंजन मात्र के लिए ही प्रशंसक होना चाहिए।

फिल्म कलाकारों के लिए पागलपन Insanity for film artists

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