बचपन की बेफिक्री और भोलापन

बचपन की बेफिक्री और भोलापन - यही बचपन की बेफिक्री और भोलापन है

न अपनो की चिंता, न परायोँ की फिकर
बात बात पर इठलाकर बातें मनवाने का हठ
भोलेपन और मासूमियत में पूछे गए अनगिनत सवाल
उत्तर न मिलने पर बारम्बार वही पूछने का खयाल
यही बचपन की बेफिक्री और भोलापन है।

छुप छुप कर घर से बाहर निकलकर मिट्टी में खेलना
कपड़े गंदे करके घर लौटकर माँ की डांट खाना
वादा करना कि फिर ऐसा नहीं होगा लेकिन फिर वही करना
माँ का हर बार जानबूझकर नासमझ बनने का दिखावा करना
यही बचपन की बेफिक्री और भोलापन है।

तुतलाती आवाज में दोस्तों की शिकायत कर के उन्हें चिढ़ाना
दोस्तों से रूठना और फिर अगले ही पल उनके साथ घुल मिलकर खेलना
अपनी माँ को दुनिया की सबसे अच्छी माँ बतलाना
माँ में ही और माँ के ही इर्द गिर्द सारी दुनियाँ को समझना
यही बचपन की बेफिक्री और भोलापन है।

स्कूल न जाने के लिए ना ना प्रकार के बहाने बनाना
कभी सिरदर्द तो कभी पेट दर्द या कभी जीभ दिखलाना
नित्यकर्म के क्रियाकलापों में बेवजह अधिक समय लगाना
स्कूल के लिए देरी हो जाने के आखिरी कारण की पैरवी करना
यही बचपन की बेफिक्री और भोलापन है।

न धन का मोह और न माया का लालच
न कोई फिक्र और न ही कोई चाहत
कोई एक चाँकलेट दिला दे तो वो देवदूत समान सुहावना
अगर चाँकलेट नहीं दिलाये तो यमदूत समान डरावना
यही बचपन की बेफिक्री और भोलापन है।

न जात का पता न धर्म को जाने
हर इंसान को सिर्फ और सिर्फ इंसान माने
दोस्त ही दुनियाँ और खेल को ही सबकुछ माने
दोस्त के प्यार और दोस्ती को ही दिल पहचाने
यही बचपन की बेफिक्री और भोलापन है।

जब से बचपन बीता है अब तो ये आलम है
ऐसा लगता है कि दुनिया में फिर से नया जन्म लिया है
सभी लोग दुनियादारी सिखानें लगे हैं
जाति, धर्म, समाज, बिरादरी आदि के बारे में बतलाने लगे हैं
दुनियाँ के हिसाब से जिओगे तो समझदार नागरिक कहलाओगे
अगर अपने मन के हिसाब से जिओगे तो नासमझ बालक बन जाओगे
यही बचपन की बेफिक्री और भोलापन है।

बचपन की बेफिक्री और भोलापन Naivety and carelessness of childhood

Written by:
Ramesh Sharma

ramesh sharma smpr news

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