स्वस्थ लोकतंत्र के लिए निष्पक्ष और निर्भीक मीडिया की जरूरत

स्वस्थ लोकतंत्र के लिए निष्पक्ष और निर्भीक मीडिया की जरूरत - आखिरकार भारत सरकार ने एनडीटीवी पर एक दिन के घोषित प्रतिबन्ध को स्थगित कर अपनी किरकिरी होने से बचा लिया। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने ये निर्णय तब लिया जब एनडीटीवी सुप्रीम कोर्ट में इस प्रतिबन्ध के खिलाफ याचिका लगा चुका था तथा इस याचिका की सुनवाई आज होनी है।

सरकार ने ये कदम तब उठाया बताया जब एनडीटीवी का प्रतिनिधिमंडल सूचना और प्रसारण मंत्री वैंकया नायडू से मिला और उनसे इस प्रतिबन्ध पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।

एनडीटीवी का कहना है कि उसने जो सूचनाएँ रिपोर्टिंग में दिखाई हैं वे सभी पब्लिक डोमेन में पहले से ही हैं और सभी न्यूज़ चैनल्स ने सामान रिपोर्टिंग की थी अकेले एनडीटीवी पर कार्यवाही अनुचित है। अगर एनडीटीवी के कहे अनुसार सभी सूचनाएँ पहले से ही सार्वजनिक जीवन में उपलब्ध थी तब प्रतिबन्ध किस बात के लिए लगाया था, यह एक सोचने का विषय है।

ज्ञातव्य है कि एनडीटीवी पर भारत सरकार ने एक दिन का प्रतिबन्ध पठानकोट आतंकवादी हमले की गलत रिपोर्टिंग करने के इल्जाम में लगाया था और यह प्रतिबन्ध 9 नवम्बर को लगना था। इस प्रतिबन्ध के तहत एनडीटीवी को इस एक दिन के लिए अपना प्रसारण बंद करना था। एनडीटीवी ने इस प्रतिबन्ध को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है तथा सुनवाई होने से पहले ही सरकार ने इसे स्थगित कर दिया है।

एनडीटीवी पर प्रतिबन्ध की चहुँ ओर आलोचना हो रही थी तथा सभी इसे राजनीति से प्रेरित निर्णय बता रहे थे। विभिन्न राजनितिज्ञो, पत्रकारों तथा एडिटर्स गिल्ड ने भी इस प्रतिबन्ध की तीखी आलोचना की है। मीडिया लोकतंत्र का चतुर्थ स्तंभ कहलाता है तथा इसका निष्पक्ष और निर्भीक रूप से कार्य करना स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अत्यावश्यक है। अगर मीडिया निष्पक्ष नहीं रहेगा और वह डर कर या फिर चापलूस बन कर काम करेगा तो वह सही और सच्ची खबरें जनता तक नहीं दिखा पायेगा।

कुछ न्यूज़ चैनल्स ने अपनी स्वामिभक्ति प्रकट करने के लिए एनडीटीवी पर इस प्रतिबन्ध को सही ठहराया है। ये चैनल्स ये बात भूल जाते हैं कि जो प्रतिबन्ध आज किसी एक चैनल पर लगा है वह कल इनपर भी तो लग सकता है। ऐसा लगता है कि जैसे पत्रकारों ने भी अलग-अलग खेमे बना लिए हैं और स्वस्थ पत्रकारिता अपना दम तोड़ते हुए प्रतीत हो रही है।

जब पत्रकार डरकर या फिर चापलूसी वश सत्ता के झूठे गुणगान करने लग जाते हैं और सत्ता की नाकामी पर कोई प्रश्नचिन्ह खड़ा नहीं करते हैं तब स्थिति बड़ी भयावह बन सकती है। मीडिया ही एकमात्र ऐसा माध्यम है जो जनता को सभी प्रकार की सूचनाएँ उपलब्ध करवाता है। जब मीडिया ही सही न्यूज़ नहीं दिखाएगा तब सही सूचनाएँ कैसे और कहाँ से प्राप्त होगी।

हमारी खुशकिस्मती है कि सारा मीडिया और सभी पत्रकार इस तरह के नहीं हैं। बहुत से पत्रकार अभी भी पूरी ईमानदारी और नेकनीयती के साथ निर्भीक रूप से सक्रीय हैं। मीडिया को निष्पक्ष रहकर कार्य करना होगा तथा सरकारों के लिए एक निंदक की भूमिका निभानी होगी क्योंकि एक निंदक ही सही आलोचना करके बुराइयों की समाप्ति में योगदान दे सकता है।

स्वस्थ लोकतंत्र के लिए निष्पक्ष और निर्भीक मीडिया की जरूरत Healthy democracy requires fair and fearless media

Post a Comment

0 Comments