सफलता के लिए संगत का महत्व

सफलता के लिए संगत का महत्व - इंसान एक सामाजिक प्राणी है तथा बिना समाज के उसका अकेला रह पाना बहुत मुश्किल होता है।

हम अपने आस पास इंसानों की भीड़ देखने के आदी हैं तथा खुद भी वक्त बेवक्त उस भीड़ का हिस्सा बने रहते हैं। हर इंसान के जीवन पर उसके आस पास के माहौल का बहुत प्रभाव पड़ता है।

यह माहौल सकारात्मक तथा नकारात्मक दोनों प्रकार का हो सकता है परन्तु अधिकतर परिस्थितियों में यह माहौल नकारात्मक ही साबित होता है।

अपनी प्रगति के लिए हमें वो सभी जरूरी कदम उठाने चाहिए जो आवश्यक होते हैं। इंसान की प्रगति का सबसे प्रमुख तथा सर्वप्रथम सहायक कारक उसके आसपास का परिवेश ही होता है।

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परिवेश से मतलब प्राकृतिक माहौल से नहीं हैं बल्कि उसके आस पास रहने वाले वे सभी लोग हैं जिनका उसके जीवन पर कभी न कभी प्रभाव पड़ता है।

इंसान अपने घर, परिवार तथा समाज से बहुत कुछ सीखता है तथा इस परिवेश का उसके मानसिक विकास पर बहुत प्रभाव पड़ता है। बहुत से लोग तो अपने आस पास के लोगों की सलाह पर ही अमल करके चलते हैं परन्तु हम यह नहीं समझ पाते हैं कि हमारे आसपास के लोग जाने अनजाने में कब, कैसे और क्यों हमारा नुकसान कर रहे हैं।

बहुत से लोग हमारे सच्चे हितेषी होने का ढिंढोरा पीटते हैं परन्तु जब भी कभी कोई आवश्यकता होती है तब वही लोग सबसे पहले गायब हो जाते हैं। इस प्रकार के लोग सिर्फ और सिर्फ अपनी सुविधा के हिसाब से मिलना चाहते हैं तथा उन्हें आपकी परेशानी से कोई लेना देना नहीं होता है।

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इसी प्रकार बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो हमेशा आपके अतीत की गलतियों को हर मौके पर सबके सामने उजागर करना पसंद करते हैं तथा वे लोग यह समझना ही नहीं चाहते हैं कि अब आपकी गलतियों का समय निकल चुका है तथा आप अपनी गलतियों से सबक ले चुके हैं।

बहुत से लोग हर कार्य में हमेशा नकारात्मक संभावनाएँ ही टटोलते रहते हैं तथा जब भी आप कोई कार्य प्रारंभ करने की सोचते हैं तब वे लोग आपको उस कार्य को असंभव बताकर उसे करने से मना करते हैं।

ऐसा जरूरी नहीं है कि इस तरह के लोग आपकी प्रगति से जलते हैं या वे आपको उन्नति करते हुए नहीं देखना चाहते हैं, बल्कि हो सकता है कि वे लोग अपने हिसाब से तो आपके लिए बहुत अच्छा निर्णय लेने का प्रयास कर रहे होते हैं, परन्तु उनके सोचने तथा निर्णय लेने की क्षमता में कमी ही उन्हें एक सीमा में बाँध देती हो।

दरअसल हर इंसान का सोचने का तरीका तथा उसकी शारीरिक एवं मानसिक क्षमता दूसरे इंसान से अलग होती है तथा हर इंसान अपनी क्षमताओं को ध्यान में रखकर ही यह तय कर पाता है कि वह क्या कर सकता है और क्या नहीं।

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बहुत से लोग अपने हित को साधने तथा हमें गुमराह करने के लिए हमसे झूठ भी बोलते रहते हैं। ऐसे लोग कभी अपनी प्रशंसा करते हैं तथा कभी हमारी प्रशंसा कर हमें गुमराह करते रहते हैं।

उपरोक्त सभी बातों का एक ही निचोड़ है कि हमें हमारी प्रगति के लिए खुद को ही निर्णय लेने होंगे क्योंकि अपनी क्षमताओं का सही-सही आंकलन सिर्फ और सिर्फ हम ही कर सकते हैं तथा कोई और हमारी क्षमताओं के बारे में उतना नहीं जान सकता है जितना हम जानते हैं।

अतः हमें बिना परिवेश से प्रभावित हुए अपने लक्ष्य को निर्धारित कर उस दिशा में सतत आगे बढ़ना होगा तभी हमें अपनी इच्छित सफलता प्राप्त हो सकती है।

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