इंसान की वास्तविक और आभासी जिन्दगी

इंसान की वास्तविक और आभासी जिन्दगी - आज का इंसान दोहरी दुनिया में जीवन व्यतीत कर रहा है जिसमे पहली वास्तविक दुनिया (Real World) है तथा दूसरी आभासी दुनिया (Virtual World) है।

वास्तविक दुनिया वह दुनिया होती है जिसमे हम भौतिक रूप से निवास करते हैं तथा आभासी दुनिया वह होती है जिसमे हमें वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं होता है।

जैसे हम घर में या कहीं पर भी रहकर जो रोजमर्रा की जिन्दगी गुजार रहे हैं वह वास्तविक दुनिया में गुजारी गई जिन्दगी है।

इसी प्रकार आज के जमाने में इन्टरनेट की भी अपनी एक अलग दुनिया है जिसपर हम अपने जीवन का अधिकांश समय गुजारते हैं।

इन्टरनेट की दुनिया में दोस्त मिल जाते हैं, पढाई हो जाती है, खरीददारी हो जाती है अतः हम यह कह सकते हैं कि जीवन की मूलभूत क्रियाओं के अलावा अन्य सभी कार्य इन्टरनेट पर हो जाते हैं।

इन्टरनेट की यह दुनिया आभासी दुनिया कहलाती है अर्थात आभासी दुनिया सिर्फ आभास कराती है परन्तु वास्तविकता से उसका कोई लेना देना नहीं होता है।

इसी प्रकार हम इंसानी जिन्दगी को भी दो भागों में बाँट सकते हैं जिसमे पहली वास्तविक जिन्दगी (Real Life) है और दूसरी आभासी जिन्दगी (Virtual Life) है। वास्तविक जिन्दगी का मतलब वह जिन्दगी जिसे हम भौतिक रूप से जीते है तथा जिसमे हम सभी चीजों को छूकर अनुभव कर सकते है।

इस जिन्दगी में हम खाते-पीते हैं, खुशी और गम का सीधा-सीधा अनुभव करते हैं अर्थात यह जिन्दगी वास्तविक दुनिया में जी जाती है।

आभासी जिन्दगी का मतलब वह जिन्दगी जिसे हम वास्तविक रूप से नहीं जीते हैं तथा वास्तविकता से इसका दूर-दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं है। यह एक प्रकार की काल्पनिक जिन्दगी होती है जिसका सम्बन्ध आभासी दुनिया से होता है।

दुनिया में हर इंसान जाने अनजाने में यह दोहरी जिन्दगी जीता है। कोई अपनी पसंद से यह जिन्दगी जीता है तथा कोई मजबूरी में यह जिन्दगी जीता है। फिल्म कलाकार भी रील और रियल लाइफ जीते हैं तथा अक्सर रील लाइफ और रियल लाइफ में विभेद करने में असक्षम हो जाते हैं।

रील लाइफ वही आभासी जिन्दगी होती है जो वास्तविकता से प्रभावित हो सकती है परन्तु हकीकत में वास्तविकता से कोसो दूर होती है।

ऐसे लोग जिनका पेशा ही आभासी दुनिया में जीना है उनके लिए यह जिन्दगी जायज हो सकती है परन्तु जब कोई बिना मतलब के अपनी जिन्दगी का अमूल्य समय इस आभासी दुनिया में नष्ट करने लग जाता है तब वह स्थिति भयावह हो जाती है एवं उसके दुष्परिणाम भी सामने आने लगते हैं।

आधुनिक समय में लगभग सारी दुनिया इस आभासी दुनिया में जी रही है जिसमे सबसे प्रमुख इन्टरनेट की दुनिया है। बहुत से लोग इन्टरनेट पर प्रतिदिन दस पंद्रह घंटे बिताने लग गए हैं तथा वास्तविक दुनिया से नाता तोड़कर इसे ही अपनी दुनिया समझने की भूल कर रहे हैं।

ये लोग इन्टरनेट पर ही अपने दोस्त बनाते हैं, अपनी खुशी और गम उनके साथ साझा करते हैं। यह रिश्ता इतना आभासी होता है कि अगर ये दोस्त वास्तविकता में एक दूसरे के सामने आ जाये तो एक दूसरे को पहचान भी नहीं पाएँ।

यह आभासी दुनिया इंसानी जीवन के लिए बहुत घातक साबित हो सकती है क्योंकि इसकी वजह से रिश्तों में आत्मीयता का अभाव होना शुरू हो गया है।

रिश्ते परस्पर मिलते रहने से मजबूत होते हैं और आभासी जीवन में मिलना जुलना सिर्फ इन्टरनेट पर होता है। इंसान भी मशीन बनता जा रहा है जिसमें भावनाओं का विलोप होता जा रहा है।

अतः अगर इंसान को इंसान बने रहना है तो परस्पर मिलना जुलना, हँसना रोना, खाना पीना, खेलना कूदना, बहुत जरूरी है अन्यथा एक दिन इंसान शारीर से तो इंसान रहेगा किन्तु मानसिक रूप से भावनाशून्य मशीन बन जायेगा।

इंसान की वास्तविक और आभासी जिन्दगी Real and virtual life of human

Written by:
Ramesh Sharma

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