चीनी हमारे शरीर के लिए अत्यंत घातक

चीनी हमारे शरीर के लिए अत्यंत घातक - अधिकतर लोगों को खाना खानें के पश्चात कुछ न कुछ मीठा खानें का बहुत शौक होता है जिसे पूर्ण करने के लिए मिठाइयाँ प्रमुख रूप से खाई जाती है।

खुशी के मौको पर भी मुँह मीठा करवानें का रिवाज सदियों से प्रचलित रहा है। हर त्यौहार और उत्सव पर कुछ न कुछ मीठा खाने का रिवाज रहा है।

क्या हमने कभी सोचा है कि हम जो मीठा खा रहे हैं वो हमारे स्वास्थ्य के लिए कितना लाभदायक या फिर हानिकारक है? क्या मीठा खाना शरीर के लिए आवश्यक है?

मीठा यानि चीनी और चीनी युक्त पेय और खाद्य पदार्थ। आज के युग में मीठे के लिए चीनी के अतिरिक्त कोई ओर विकल्प नहीं हैं। पुराने जमानें में चीनी नामक कोई भी पदार्थ नहीं हुआ करता था और मीठे के लिए सिर्फ और सिर्फ गुड़ का प्रयोग किया जाता था।

यह गुड़ गन्नें के रस से प्राकृतिक विधियों द्वारा बनाया जाता था जिसमें किसी भी तरीके के रसायन का प्रयोग नहीं किया जाता था। इस गुड़ का रंग अमूमन काला होता था तथा यह शरीर के लिए फायदेमंद होता था।

आधुनिक गुड़ में कालापन हटाने तथा इसे साफ करने के लिए रसायनों का प्रयोग किया जाता है जो कि हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होते हैं। रसायनों के प्रयोग द्वारा प्राप्त गुड़ में पीलापन तथा स्वाद में थोड़ा खारापन आ जाता है।

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मीठा एक स्वाद है जो चीनी यानि शक्कर (शुगर) के प्रयोग से पैदा होता है। यह स्वाद बहुत से लोगों के लिए एक लत बन जाता है जिसके बिना रह पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। ऐसे लोग मीठा खानें के बहानें ढूंढते रहते हैं।

मीठा हमारे शरीर के लिए बहुत आवश्यक होता है क्योंकि यह शरीर को मुख्य रूप से ऊर्जा प्रदान करता है जो हमारे शरीर को सुचारू रूप से चलानें के लिए बहुत जरूरी होती हैं।

परन्तु इसके लिए हमें चीनी खानें की अधिक आवश्यकता नहीं होती हैं क्योंकि हमारा शरीर स्वयं इस शुगर को बनानें में दक्ष होता है। हम जो कार्बोहायड्रेट और फैट (वसा) खाते हैं उसका एक भाग मेटाबोलिक क्रियाविधियों द्वारा शुगर में परिवर्तित हो जाता है।

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चीनी भी गुड़ की भाँति गन्ने से ही बनती है परन्तु इसको बनाने के लिए रसायनों जैसे सल्फर आदि का प्रयोग किया जाता है। इन रसायनों के प्रयोग से यह सफेद, चमकदार क्रिस्टलों के रूप में परिवर्तित हो जाती है।

यह रसायनों से परिशोधित चीनी हमारे शरीर के लिए अत्यधिक नुकसानदायक है। यह चीनी सिर्फ और सिर्फ मीठा स्वाद प्रदान करने के अतिरिक्त कुछ भी पोषण प्रदान नहीं करती है।

यह सिर्फ पोषण रहित ऊर्जा ही प्रदान करती है। इस चीनी के अत्यधिक प्रयोग से असमय मोटापा, मधुमेह, हृदयरोग, पाचन सम्बन्धी रोग, दन्त रोग, याददाश्त में कमी आदि रोग जन्म लेने लगते हैं।

शरीर अपनी जरूरत के लिए शुगर का निर्माण अपने आप कर लेता है और जब हम बाहर से अत्यधिक शुगर लेते हैं तो यह शरीर में फैट (वसा) के रूप में इकठ्ठा होना शुरू हो जाती है जिसके फलस्वरूप शरीर मोटा होना शुरू हो जाता है।

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मोटापा सभी बिमारियों की जड़ होता है और इसकी वजह से शरीर आलसी, थुलथुल और भारी हो जाता है। मोटापे की वजह से मधुमेह, ह्रदय सम्बन्धी बीमारियाँ, असमय बुढ़ापे के से लक्षण प्रकट होने लगते हैं।

जिस प्रकार अत्यधिक नमक का प्रयोग शरीर के लिए घातक होता है ठीक उसी प्रकार शुगर का प्रयोग भी घातक होता हैं।

अगर हमें स्वस्थ रहना है तो हमें नमक और चीनी जैसे दोनों सफेद जहरों से मुक्ति प्राप्त करनी होगी और इनका प्रयोग कम से कम करना होगा।

चीनी के विकल्प के तौर पर हम शुद्ध काले गुड़ का प्रयोग भी कर सकते है जो कि आयरन और कैल्शियम से भरपूर होता है।

चीनी हमारे शरीर के लिए अत्यंत घातक Sugar is extremely dangerous for our body

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