भंसाली प्रकरण अन्य फिल्मकारों के लिए सबक

भंसाली प्रकरण अन्य फिल्मकारों के लिए सबक - संजय लीला भंसाली के साथ मारपीट वाले मामले में फिल्म उद्योग से मिली जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आई है। कई फिल्मकारों तथा कलाकारों ने भंसाली के साथ हुई मारपीट का विरोध किया है परन्तु अधिकतर ने इस मसले पर प्रतिक्रिया देने से बचना चाहा है।

सुशांत सिंह राजपूत ने इस घटना के विरोध में ट्विटर पर अपने नाम के आगे लगे राजपूत शब्द को हटा दिया था परन्तु उन्होंने भी अगले ही दिन इसे वापस लगाकर शायद अपनी भूल को सुधार लिया।

दरअसल हर आदमी के व्यावसायिक हित उसकी व्यक्तिगत जिन्दगी पर इतने ज्यादा भारी पड़ने लग गए हैं कि वह सबसे पहले अपने व्यक्तिगत हित को साधने में लग जाता है। कोई भी घटना घट जाती है तथा कुछ दिन की सुर्खियों के पश्चात फिर उसका नामोनिशान भी नहीं रह जाता है। हर घटना को बहुत कुछ राजनीतिक रंग देने की सफल और असफल कोशिशें जारी रहती है।

भंसाली की लीला का छोटे से महाभारत के साथ बहुत शीघ्र सुखद समापन हो गया है जिसमे भंसाली ने करणी सेना द्वारा इच्छित सभी मांगे मान ली है। फिल्मकार एक चतुर व्यापारी होता है तथा वह अपने हित साधने के लिए कभी भी कहीं भी पलटी मारने को तैयार रहता है। भंसाली एक ऐसे विषय पर फिल्म बना रहे हैं जो न केवल ऐतिहासिक हैं वरन वह बहुत सारे लोगों के मान सम्मान के साथ जुड़ा हुआ है।

रानी पद्मिनी का इतिहास राजस्थान के लिए एक गौरव गाथा है जिसने अपने आत्म सम्मान की रक्षा के लिए जौहर करके जीते जी अपने प्राण त्याग दिए थे। जिस रानी ने अल्लाउद्दीन खिलजी के सामने जाना तक गवारा नहीं किया उसी रानी का अल्लाउद्दीन खिलजी के साथ कथित रूप से प्रेम प्रसंग फिल्माया जा रहा था। इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश करने की इजाजत किसी को भी नहीं दी जा सकती है फिर चाहे वह कोई भी क्यों न हो।

राजस्थान के लोग बहुत स्वाभिमानी लोग है तथा यहाँ की धरती वीरों की धरती है। यहाँ के कण-कण में वीरगाथाओं का समावेश है। ऐसे स्वाभिमानी लोग अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए कुछ भी कर सकते हैं। फिल्मकारों की यह सोच बनती जा रही है कि फिल्म को सफल बनाने के लिए उसमे चालू मिर्च मसाले डालने जरूरी होते हैं। अगर इन्ही मसालों पर फिल्म बनानी हो तो फिर उन्हें ऐसे ऐतिहासिक विषयों से बचना चाहिए क्योंकि ये विषय हमारी विरासत तथा आस्था के साथ जुड़े होते हैं।

बहरहाल भंसाली ने विवादित दृश्यों को हटाने की बात मानकर अपनी बुद्धिमता का परिचय दिया है तथा इस मसले का एक बार तो अंत हो गया है। सभी फिल्मकारों को अपने देश के इतिहास और विरासत का हमेशा सम्मान करना चाहिए फिर चाहे वह रील लाइफ हो या फिर रियल लाइफ। जब हम भारत के लोग ही किसी बाहरी आक्रान्ता सुल्तान की गाथा को अपने निजी लाभ के लिए बढ़ा चढ़ाकर पेश करेंगे तो हमारी विरासत का सम्मान और रक्षा कौन करेगा?

यह सत्य है कि हर देश में जयचंद जैसे लोग भी होते हैं परन्तु ऐसे लोगों की वजह से हमें इतिहास के तथ्यों को गलत ढंग से पेश करने की इजाजत नहीं मिल जाती है। फिल्मों का समाज पर बहुत असर होता है तथा इसमें दिखाए इतिहास को लोग सच समझ बैठते हैं अतः हर फिल्मकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश नहीं करे।

भंसाली प्रकरण अन्य फिल्मकारों के लिए सबक Bhansali case will be lesson for other filmmakers

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