क्या मर्द औरत की यौन शक्ति से डरता है?

क्या मर्द औरत की यौन शक्ति से डरता है? - ईश्वर ने मानव के अतिरिक्त अन्य सभी प्राणियों में नर तथा मादा को लगभग समान रूप से ताकतवर बनाया है। धरती पर केवल इंसान ही एक ऐसी प्रजाति है जिसमे नर के मुकाबले मादा की ताकत प्राकृतिक रूप से कम होती है। जब से पृथ्वी का उद्गम हुआ है तथा सभ्यता अस्तित्व में आई है तभी से हमारा समाज पुरुष प्रधान समाज रहा है।

यह एक कड़वा सच है कि इस समाज में पुरुष, महिला को अपनी सहचर ना समझकर अनुचर समझता है। शायद यहाँ भी डार्विन का सिद्धांत (सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट) लागू होता है जिसके अनुसार सर्वाधिक ताकतवर ही सत्ताधारी होता है।

ईश्वर ने औरत को मर्द के मुकाबले भले ही शारीरिक ताकत कम दी हो परन्तु इसे अपार मानसिक शक्ति दी है जिसमे इच्छाशक्ति प्रमुख है। तभी तो यह लाखों वर्षों से उपेक्षित रहने के पश्चात भी अपना वजूद कायम रखने में सक्षम रही है। औरत की सहनशीलता के सम्मुख ईश्वर भी नतमस्तक है। जितना दुःख दर्द औरत अपनी सारी जिन्दगी सहन करती है अगर उसका कुछ प्रतिशत भी मर्द को सहन करना पड़े तो उसे औरत की ताकत का पता चले। इंसान भी बड़ा अजीब प्राणी है जो एक तरफ तो नारी की प्रतीक देवियों की पूजा करता है और दूसरी तरफ उन्ही देवियों का रूप नारी का शोषण करता है। शायद जानवरों में इंसान से अधिक इंसानियत हैं जो कभी भी मादा प्रजाति का शोषण नहीं करते हैं।

सदियों से मर्द औरत को अन्य मामलों की तरह शारीरक संबंधों के लिए भी अपनी इच्छानुसार दबाता आ रहा है। इसका कारण यह हो सकता है कि या तो पुरुष प्रधान समाज में औरत को शारीरिक सुख भोगने का हक ही नहीं देना चाहता है, या फिर वह औरत की शारीरिक सम्बन्ध स्थापित करने की ताकत से डरता है। शायद इसी लिए औरत को बचपन से ही शारीरिक सम्बन्ध बनाना तो दूर, इसके बारे में बात करने से भी वंचित रखा जाता है। शायद इसी बात को ध्यान में रखकर कुछ समाजों में तो औरत का खतना (औरत की जननेंद्रिय के सर्वाधिक संवेदनशील हिस्से क्लाइटोरिस को काट दिया जाता है) तक कर दिया जाता है ताकि वो शारीरिक संबंधों का आनंद ना ले सके।

ऐसा प्रतीत होता है कि वास्तव में यह औरत के प्रति मर्द का डर होता है। मर्द जानता है कि अगर औरत अपनी पूर्ण सहभागिता के साथ शारीरिक संबंधों में हिस्सा लेने लग जाएगी तो मर्द उसके सामने कहीं नहीं टिक पाएगा। यह कटु सत्य है कि शारीरिक संबंधो में औरत मर्द के मुकाबले बहुत ताकतवर होती है। शायद इसी सच्चाई को छुपाने के लिए तथा अपनी मर्दानगी को बरकरार रख, उसके झूठे प्रदर्शन के लिए मर्द औरत को किसी न किसी बहाने से शारीरिक संबंधों के सुख से दूर रखता आया है। जाने अनजाने में इसे अशिक्षित रखा जाता है तथा इसके लिए सेक्स की बात करना भी बेशर्मी समझी जाती है।

मर्दों ने बड़ी चालाकी से लज्जा को औरत का गहना बना दिया तथा सभी औरतों के लिए इसे पहनना अनिवार्य भी कर दिया। इस कार्य में मर्दों का साथ भी औरतों ने ही दिया है और इसी लिए कहा भी जाता है कि औरत की सबसे बड़ी दुश्मन भी औरत ही है। औरत को परम्पराओं तथा संस्कृति के ऐसे जंजाल मे जकड़ दिया गया ताकि वो इसके अलावा कुछ और सोच समझ ही न पाए तथा मर्द ने बड़ी चालाकी से सभी कार्यों में अपने जीवन के लिए उन्मुक्तता का माहौल तैयार कर लिया।

वैसे भी समाज में लड़की को हमेशा पराया धन समझा जाता रहा है जिसे एक घर से दूसरे घर जाना होता है। विडम्बना देखिए कि दो घरों के चक्कर में उसका स्थाई रूप से एक भी घर नहीं हो पाता है। उसे सारी उम्र यह पता करने में लग जाते हैं कि आखिर उसका घर कौनसा है। बचपन में पीहर पक्ष यह बात दिमाग में भरने में लगा रहता है कि लड़की का घर ससुराल होता है। शादी के पश्चात जब ससुराल में कोई बात हो जाती है तो ससुराल वाले तुरंत बोल देते हैं कि यह तुम्हारा घर नहीं है। पीहर पक्ष तथा ससुराल पक्ष दोनों मिलकर गेंद एक दूसरे के पाले में डालने के लिए प्रयासरत रहते हैं।

हमारा समाज तथा हमारे मूल्य बाजारवाद की अंधी दौड़ में इतने अधिक खोखले हो गए हैं कि अधिकतर मामलों में औरत का वजूद सिर्फ और सिर्फ सुन्दरता से जोड़ दिया जाता है। औरत को कोमलांगी कहकर जताया जाता है कि तुम कमजोर हो। औरत को सिर्फ नुमाइश की वस्तु बनाकर रख दिया गया है जिसका प्रमाण यह है कि मर्दों के काम में लिए जाने वाले उत्पादों का प्रचार भी औरत के द्वारा करवाया जाता है। सार्वजनिक रूप से औरतों को अपनी देह प्रदर्शित करने के लिए किसी न किसी प्रकार का प्रलोभन दिया जाता है।

आखिर सभी नियम कायदे औरत के लिए ही क्यों होते हैं? क्यों औरत के मन में बचपन से ही यह बात बैठा दी जाती है कि तू लड़की है तथा तू लड़कों से कमतर है। क्यों लड़की को लड़कों के मुकाबले कमतर समझा जाता है? क्यों लड़की को लड़कों की तरह शिक्षा नहीं देकर उसे शिक्षा से वंचित रखा जाता है? क्यों लड़की को बचपन से शर्मीला बनने पर जोर दिया जाता है? क्यों उसे सिखाया जाता है कि लज्जा ही औरत का गहना होता है? क्यों औरत को अपने मनमाफिक जीवन जीने का अधिकार नहीं दिया जाता है?

क्या मर्द औरत की यौन शक्ति से डरता है? Is man afraid of the lovemaking power of woman?

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