इंसान के जीवन में पैसे का महत्त्व

इंसान के जीवन में पैसे का महत्त्व - इस दुनिया में इतनी अधिक गरीबी है कि बहुत से लोगों के लिए दो जून की रोटी मिलना ही उनका सबसे बड़ा लक्ष्य होता है।

करोड़ों लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल पाता है तथा उन्हें अधिकतर एक वक्त कुछ खाकर ही अपना तथा अपने परिवार को पालना पड़ता है।

सभी देशों में धन और रहन सहन के हिसाब से समाज तीन स्तरों में बटा हुआ है जिनमे पहला उच्च वर्ग, दूसरा मध्यम वर्ग तथा तीसरा निम्न वर्ग। इनके अलावा अति धनी लोगों के लिए भी आजकल एक और वर्ग बना है जिसे अंग्रेजी में सुपर रिच ग्रुप कहते हैं।

उच्च वर्ग धनवानों के लिए तथा निम्न वर्ग गरीबों के लिए एवं मध्यम वर्ग इन दोनों के बीच में जीवन यापन करने वाले लोगों के लिए होता है।

निम्न वर्ग के लोग मध्यम वर्ग जैसा तथा मध्यम वर्ग के लोग उच्च वर्ग जैसा जीवन जीनें के लिए लालायित रहते हैं। किसी वर्ग से उससे उच्च वर्ग में छलांग लगाने के लिए धन ही प्रमुख साधन होता है।

आधुनिक युग में सभी कार्यों के लिए धन की प्रमुख भूमिका होती है। धनवान आदमी के बिगड़ते कार्य धन की वजह से बन जाते हैं तथा निर्धन के बनते कार्य धनाभाव के कारण बिगड़ जाते हैं।

हर व्यक्ति का परम लक्ष्य अधिकाधिक धनार्जन करना है भले ही उसके लिए कुछ भी करना पड़े। किसी जमाने में शिक्षा ज्ञान तथा संस्कार प्राप्त करने के लिए ली जाती थी परन्तु अब शिक्षा प्राप्ति का प्रमुख उद्देश्य धन प्राप्ति ही होता है।

कहते हैं कि पैसा भगवान नहीं है परन्तु भगवान से कम भी नहीं है। इस बात से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि हमारे जीवन में धन का क्या महत्त्व हो गया है। यहाँ पैसे की भगवान से तुलना करने का मतलब पैसे का महत्त्व बताना है।

आधुनिक युग में हर इंसान के लिए पैसा प्रथम प्राथमिकता पर आ गया है तथा अन्य चीजें हाशिए चली गई है। जो व्यक्ति जितना अधिक धनी है उसे उतना ही अधिक सामर्थ्यवान समझा जाता है और उसके लिए सभी कार्य अत्यंत सरल हो जाते हैं।

रिश्ते-नाते, सम्बन्ध, परम्पराएँ, संस्कार, आदि का निर्वाह करना या नहीं करना धनवान के लिए उसकी मर्जी पर निर्भर करता है परन्तु यही सभी कार्य अन्य के लिए अत्यावश्यक होती है।

उच्च वर्ग के लोग अपनी मर्जी से जीवन गुजारते हैं परन्तु अन्य वर्ग वाले ऐसा नहीं कर पाते हैं, शायद परम्पराओं और संस्कारों को निभाने का दायित्व इन्होने ले रखा है।

दरअसल आधुनिक युग पूर्णतः आर्थिक युग है तथा यहाँ सभी चीजों को तौलने का पैमाना धन होता है। धनी व्यक्ति इस पैमाने पर खरे उतरते हैं तथा निर्धन के लिए यहाँ कोई जगह नहीं होती है।

धनवान व्यक्ति के सभी लोग रिश्तेदार होते हैं तथा समाज में उसका सम्मान तथा प्रतिष्ठा चरम पर होती हैं।

एक अनपढ़ परन्तु धनी व्यक्ति की बात एक शिक्षित परन्तु निर्धन व्यक्ति की बात से से अधिक वजनदार एवं प्रभावपूर्ण समझी जाती है। धनी होना ही बुद्धिमानी का पर्याय बन गया है।

धनी होने का मतलब बुद्धिमान समझा जाता है और जिसके पास धन नहीं होता है उसकी बुद्धिमानी पर संशय ही संशय होता है।

अब यह बात कि धन से आत्म संतुष्टि नहीं मिलती है शायद बैमानी सी प्रतीत होती है। बिना धन के व्यक्ति आत्म संतुष्टि प्राप्त करने लायक ही नहीं रह जाता है क्योंकि पूरी दुनिया सिर्फ और सिर्फ धन की वजह से चलती हुई सी लग रही है। धन का महत्त्व चरम पर है।

इंसान के जीवन में पैसे का महत्त्व Importance of money in human life

Written by:
Ramesh Sharma

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