फार्मेसी प्रोफेशन में विद्यार्थियों का बढ़ता रुझान

फार्मेसी प्रोफेशन में विद्यार्थियों का बढ़ता रुझान - फार्मेसी का मतलब भेषज विज्ञान है जिसमे विद्यार्थियों को दवाइयों के निर्माण, भण्डारण तथा वितरण की सम्पूर्ण जानकारी दी जाती है।

आधुनिक युग में दवाइयाँ इंसान के लिए जीवन रेखा है तथा बिना दवाइयों के जीवन को सुखमय जीना बहुत मुश्किल हो गया है। हर इंसान कहीं न कहीं, किसी न किसी रूप में दवाइयों का सेवन कर रहा है।

इन दवाइयों के लिए जिम्मेदार तथा जानकार व्यक्ति को फार्मासिस्ट कहते हैं जिसको दवाइयों से सम्बंधित सभी तरह का ज्ञान होता है। फार्मासिस्ट ही वह व्यक्ति होता है जिसे दवाइयों के निर्माण से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी होती है।

फार्मासिस्ट ही वह व्यक्ति होता है जिसे दवाइयों के भण्डारण तथा रखरखाव की सम्पूर्ण जानकारी होती है। फार्मासिस्ट ही वह व्यक्ति होता है जिस पर दवाइयों के उचित विक्रय की सम्पूर्ण जिम्मेदारी होती है।

आम तौर पर दवा विक्रेता को ही फार्मासिस्ट कहा या फिर समझ लिया जाता है परन्तु हमें यह ध्यान रखना होगा कि सभी दवा विक्रेता फार्मासिस्ट हो यह जरूरी नहीं होता है। कोई भी व्यापारी फार्मासिस्ट को अपने यहाँ नौकरी पर रखकर दवा की दुकान खोल सकता है।

अतः यह जरूरी नहीं है कि दवा विक्रेता फार्मासिस्ट हो परन्तु फार्मासिस्ट दवा विक्रेता जरूर हो सकता है। अतः दवा खरीदते समय हम सभी को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि दवा देने वाला व्यक्ति फार्मासिस्ट के अतिरिक्त कोई अन्य नहीं हो क्योंकि आधिकारिक रूप से दवा वितरण के लिए केवल फार्मासिस्ट ही अधिकृत होता है।

फार्मासिस्ट दवाओं से संबधित सभी तरह का ज्ञान पढ़ाई करके प्राप्त करता है। फार्मासिस्ट बनने के लिए न्यूनतम दो साल का डिप्लोमा कोर्स जिसे डी फार्मा या फिर चार साल का डिग्री कोर्स जिसे बी फार्मा कहा जाता है, करना पड़ता है।

डिप्लोमा कोर्स करने वाला प्रमुख रूप से कम्युनिटी फार्मासिस्ट के रूप में दवाओं के विक्रय सम्बंधित जिम्मेदारी को उठाता है। हम यह कह सकते हैं कि जहाँ पर दवाइयाँ होंगी वहीँ पर फार्मासिस्ट की आवश्यकता होगी।

डिग्री कोर्स करने वाला फार्मासिस्ट डिप्लोमा कोर्स करने वाले फार्मासिस्ट के अतिरिक्त दवाओं के निर्माण, उसकी टेस्टिंग तथा क्वालिटी कंट्रोल, विपणन आदि में भी प्रमुख भूमिका निभाता है।

यह ड्रग इंस्पेक्टर या फिर ड्रग कंट्रोल ऑफिसर बनकर दवाओं के निर्माण, भण्डारण तथा विक्रय स्थलों की जाँच करके दवाइयों की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने में प्रमुख भूमिका निभाता है।

दवाइयों के ग्राहक आमतौर पर मरीज होते हैं या फिर मरीजों के लिये उनके परिजन इन दवाओं को फार्मासिस्ट से खरीदते हैं। फार्मासिस्ट डॉक्टर के पर्चे के अनुसार मरीज को दवाइयाँ देता है तथा इस प्रकार हम देख सकते हैं कि फार्मासिस्ट मरीज तथा डॉक्टर दोनों से जुड़ा रहता है।

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि फार्मासिस्ट डॉक्टर तथा मरीज दोनों के बीच की एक महत्वपूर्ण कड़ी है जो इन दोनों को आपस में जोड़े रखती है।

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दवाइयों को लेकर फार्मासिस्ट की वही भूमिका होती है जो बीमारियों को लेकर डॉक्टर की होती है। फार्मासिस्ट का काम दवा वितरण के साथ-साथ पेशेंट काउंसलिंग का भी होता है।

फार्मासिस्ट मरीज को दवा के सम्बन्ध में सभी तरह की जानकारी उपलब्ध करवाता है जिसमे दवा को लेने का तरीका, उसकी मात्रा तथा उससे होने वाले दुष्प्रभाव आदि प्रमुख है।

विद्यार्थियों में पिछले कुछ वर्षों से फार्मेसी की शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ रहा है तथा समाज भी धीरे-धीरे इस तरफ जागरूक हो रहा है।

बहुत से प्रदेशों जैसे महाराष्ट्र, गुजरात आदि में दवाइयों की दुकानों पर फार्मासिस्ट की अनिवार्यता सुनिश्चित होने से उन दवा विक्रेताओं में काफी घबराहट तथा उथल पुथल मची हुई है जो बिना फार्मासिस्ट की नियमित उपस्थति के अपनी दुकान संचालित कर रहे हैं।

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पहले जहाँ दवा विक्रेताओं का काम सिर्फ फार्मासिस्ट का लाइसेंस किराये पर लेकर चल जाता था वहीँ अब उन्हें फार्मासिस्ट को मोटी तनख्वाह देकर अपनी दुकान पर रखना पड़ रहा है।

भारत सरकार की डिजिटल इंडिया स्कीम के तहत सभी कार्यों, योजनाओं तथा विभागों को ऑनलाइन करने से घपलों में काफी कमी आने की सम्भावना है।

सभी कार्यरत रजिस्टर्ड फार्मासिस्टों के लिए आधार नंबर अनिवार्य करने से जहाँ एक ही फार्मासिस्ट को चार-चार दुकानों पर कार्यरत दिखाकर संचालित दुकानों पर गाज गिरेगी वहीँ फार्मेसी प्रोफेशन को भी नई ऊँचाइयाँ प्रदान करेगी।

अब वह दिन दूर नहीं है कि जब सभी दवा की दुकानों पर सिर्फ प्रशिक्षित व्यक्ति यानि फार्मासिस्ट ही दवाइयों का वितरण करेगा। आगाज की शुरुआत हो चुकी है तथा अब तो बस सिर्फ अंजाम ही देखना है।

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इन सभी जरुरी कदमों की वजह से फार्मेसी प्रोफेशन की वास्तविक महत्ता जन सामान्य में उजागर होने से इस प्रोफेशन की तरफ विद्यार्थियों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है।

अब तो यह आलम है कि सभी फार्मेसी महाविद्यालयों में सीटें पूरी तरह से भरी हुई है तथा प्रवेश बमुश्किल ही मिल पा रहा है। डिप्लोमा कोर्स में एडमिशन के लिए विद्यार्थियों की बाढ़ सी आई हुई है तथा अगले सत्र तक के प्रवेश भी अघोषित रूप से हो चुके हैं।

सुधार के सिर्फ छोटे से कदम से फार्मेसी प्रोफेशन की काया पलट रही है तो फिर यह कल्पना की जा सकती है कि जिस दिन सब कुछ नियमों से संचालित होने लग जायेगा तब फार्मेसी प्रोफेशनल्स की सामाजिक तथा आर्थिक स्थिति क्या होगी।

फार्मेसी प्रोफेशन में विद्यार्थियों का बढ़ता रुझान Increasing trend of students in Pharmacy Profession

Written by:
Ramesh Sharma

ramesh sharma pharmacy tree

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