भारत और रूस की टूटती मित्रता

भारत और रूस की टूटती मित्रता - भारत और रूस की दोस्ती पंडित जवाहरलाल नेहरु के जमाने से ही है तथा इस दोस्ती की गाँठ इतनी मजबूत है कि हर भारतवासी को इस दोस्ती पर नाज रहा है। जब-जब आवश्यकता हुई है रूस ने भारत का सभी अन्तराष्ट्रीय मंचो पर खुल कर समर्थन किया है।

पिछले दो तीन वर्षों से ऐसा लग रहा है कि भारत और रूस के रिश्तों में अब वो पहले जैसी गर्मजोशी का अभाव होता जा रहा है तथा मित्रता टूटती जा रही है।

चाइना पाकिस्तान इकनोमिक कॉरिडोर (CPEC) चाइना की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसपर चाइना ने लगभग छियालीस अरब डॉलर का निवेश किया है। इस कॉरिडोर के तहत लगभग तीन हजार किलोमीटर का रेल एवं सड़क नेटवर्क तैयार होगा जो दक्षिणी पाकिस्तान को पश्चिमी चाइना से जोड़ेगा।

क्या कारण है कि रूस ने अपने पुराने रुख से बदलते हुए चाइना पाकिस्तान इकनोमिक कॉरिडोर (CPEC) का खुलकर समर्थन करना शुरू कर दिया है? क्या कारण है कि रूस ने भारत के ऐतराज के बावजूद पाकिस्तान के साथ संयुक्त सैन्याभ्यास किया? क्या कारण है कि रूस भारत से ज्यादा पाकिस्तान और चाइना के नजदीक जाने लग गया है?

रूस के रिश्ते आजकल पाकिस्तान के साथ बढ़ते ही जा रहे हैं तथा चाइना के साथ भी उसके रिश्ते काफी अच्छे हैं। रूस के यूरेशियन इकनोमिक यूनियन प्रॉजेक्ट यानि EEUP का CPEC के साथ लिंक होने से उसका चाइना के साथ-साथ पाकिस्तान के साथ सीधा सम्बन्ध हो जाएगा जिसका सीधा-सीधा असर भारत पर भी पड़ेगा क्योंकि CPEC पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरेगा।

रूस और भारत के बीच यह दूरियाँ तब बढ़ रही है जब भारत पाकिस्तान को अन्तराष्ट्रीय बिरादरी में अलग थलग करने की मुहीम में लगा हुआ है।

निश्चित रूप से भारत के इन प्रयासों को धक्का लगेगा क्योंकि भारत का साथ किसी और ने दिया या नहीं दिया परन्तु रूस ने हमेशा साथ देकर पक्के मित्र होने का सबूत दिया है।

जब से भारत की अमेरिका के साथ नजदीकियाँ बढ़ने लगी है तब से ही रूस की भारत के साथ दूरियाँ बढ़ना शुरू हुई है। यह हमारी सरकार को तय करना है कि दशकों पुराना मित्र रूस ज्यादा भरोसेमंद है या फिर कुछ वर्षों से अमेरिका के साथ बढ़ता हुआ रिश्ता ज्यादा भरोसेमंद है।

यह बात सर्वसत्य है कि पुराना मित्र हमेशा नए मित्रो से बहुत ज्यादा भरोसेमंद होता है क्योंकि नई मित्रता को परखना होता है जबकि पुरानी मित्रता परखी हुई होती है।

अमेरिका किसी भी देश के साथ दोस्ती अपने आर्थिक और राजनीतिक फायदे के लिए अधिक करता है। भारत के लिए अमेरिका शायद रूस जैसा भरोसेमंद दोस्त साबित नहीं हो सके।

वैसे भी भारत को रूस के साथ मित्रता में दरार पैदा करके अमेरिका के साथ सम्बन्ध नहीं बढ़ाने चाहिए। हमें हमारी उसी पुरानी गुट निरपेक्षता वाली नीति पर चलना चाहिए जिससे अब भारत ने किनारा करना शुरू कर दिया है।

भारत सरकार को अपनी नई नीतियों पर पुनर्विचार कर इस बात का आंकलन करना चाहिए कि आखिर चूक कहाँ हो रही है। हमें शीघ्रातिशीघ्र इन कारणों को ढूँढकर इनका समाधान करना होगा अन्यथा हो सकता है कि हम रूस जैसे विश्वसनीय साथी को हमेशा के लिए खों दें।

भारत और रूस की टूटती मित्रता Stretching Indo-Russian friendship

Written by:
Ramesh Sharma

ramesh sharma smpr news

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