रोजगार देने में पूर्णतया नाकाम राजस्थान सरकार

रोजगार देने में पूर्णतया नाकाम राजस्थान सरकार - जब से हमारे प्रधान सेवक ने पकौड़े तलने को रोजगार से जोड़ा है तब से देश में पकौड़ा पॉलिटिक्स को लेकर राजनीति तेज हो गई है। जिस प्रकार भारतीय जनता पार्टी ने चायवाले के मुद्दे को लपक लिया था ठीक उसी प्रकार इस बार विपक्षी पार्टियों ने पकौड़े तलने का मुद्दा झपट लिया है।

विपक्षी पार्टियों द्वारा इस बात की निंदा की जा रही है वहीँ दूसरी तरफ सत्ता पक्ष द्वारा भाँति-भाँति के उदाहर्ण देकर पकौड़ा गान किया जा रहा है तथा पकौड़े को रोजगार का विकल्प ठहराया जा रहा है। देश में बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है वहीँ हमारे नेता पकौड़ा-पकौड़ा खेल रहे हैं। युवाओं को रोजगार दिलाने को लेकर कोई भी नेता तथा पार्टी बात नहीं कर रही है।

बेरोजगारी का यह बढ़ता हुआ आलम केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकारों के लिए भी अत्यधिक चिंताजनक है बशर्ते ये इसको गंभीरता से लें। केंद्र सरकार ने हर वर्ष एक करोड़ रोजगार सृजित करने की बात कही थी परन्तु वास्तविक धरातल पर लाखों रोजगार भी उपलब्ध नहीं करवाए जा रहे हैं।

राजस्थान के हालात तो वैसे ही चिंताजनक है। राजस्थान में पिछले चार वर्षों में कुल चार लाख युवाओं ने विभिन्न रोजगार कार्यालयों में पंजीयन करवाया लेकिन साढ़े तीन सौ करोड़ रुपयों से अधिक खर्च करने के पश्चात भी लगभग पौने आठ सौ बेरोजगारों को प्राइवेट नौकरी ही मिल पाई है। ऐसा लगता है कि राजस्थान में सरकारी नौकरियाँ भी सरस्वती नदी की तरह से लुप्त हो गई है।

अगर हम सीकर जिले के रोजगार कार्यालय के आंकड़ों पर ध्यान दें तो पाएँगे कि इस कार्यालय में पिछले तीन वर्षों में 50,373 बेरोजगारों ने पंजीयन कराया है। यह सरकारी आँकड़ा है परन्तु वास्तविक रूप से यह आँकड़ा दो लाख से भी ऊपर है क्योंकि अधिकतर युवा रोजगार कार्यालय में पंजीयन नहीं करवाते हैं।

राज्य सरकार इन बेरोजगार युवाओं को 500 रुपए मासिक के हिसाब से सालाना छह हजार रुपए बेरोजगारी भत्ता देती है जो कि नाकाफी है। क्या 500 रुपए महीने में घर चलाया सकता है? सीकर जिले में पिछले तीन वर्षों में नौ करोड़ रुपए बेरोजगारी भत्ता देने में खर्च हो चुके हैं।

वर्तमान बेरोजगारी भत्ता अक्षत योजना के नाम से दिया जाता है। इस योजना के अंतर्गत 01 अप्रैल 2017 से पुरुष बेरोजगार को 650 रुपए प्रतिमाह और महिला बेरोजगार को 750 रूपए प्रतिमाह भत्ता देने का प्रावधान है। स्नातक स्तरीय बेरोजगारों को यह भत्ता 2 वर्ष तक दिया जाता है।

जिला रोजगार विभाग के अनुसार उसने रोजगार मेलों में युवाओं को प्राइवेट कंपनियों में जॉब दिलाया है। परन्तु क्या रोजगार कार्यालय में पंजीयन प्राइवेट नौकरी करने के लिए करवाया जाता है?

रोजगार देने में पूर्णतया नाकाम राजस्थान सरकार Rajasthan government failing to provide employment

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