हम धरती को उजाड़ने पर क्यों तुले हुए हैं?

हम धरती को उजाड़ने पर क्यों तुले हुए हैं? - अगर हमारा यह विश्वास है कि इस धरती को हमें बचाने की कोई जरुरत नहीं है कोई और इसे बचा लेगा तो हम बहुत बड़े खतरे को आमंत्रित कर रहे हैं।

अगर हर इंसान यही सोचकर अपनी जिम्मेदारियों से भाग जायेगा तो इस धरती पर जिम्मेदारी कौन निभाएगा? क्या हम पशु पक्षियों पर ये जिम्मेदारी डाल दे? क्या इस धरती को पशु पक्षियों ने नुकसान पहुँचाया है?

जानवर तो आज भी वही जीवन जी रहा है जो वो हजारो वर्षो पहले जीता था। जीवन जीने का तरीका तो इंसान का बदला हैं। इंसानी जीवन सुख सुविधाओं से ओत प्रोत हो गया है और ये सम्पूर्ण सुख सुविधाएँ धरती को विनाश की तरफ धकेल कर प्राप्त हो रही है।

हम यह भूल गए है कि स्वच्छ वातावरण ही स्वस्थ जीवन का आधार है। पिछली कुछ सदियों से विकास की आड़ में हम लोगों ने किसी न किसी तरह से इस धरती को नष्ट किया है। आधुनिक जीवन जीने की होड़ में हम प्रकृति को कहीं पीछे छोड़ कर उससे बहुत दूर हो चुके हैं।

इसी आधुनिकता और विलासिता की प्राप्ति हेतु हमने औधोगिकरण का रास्ता चुना जो प्रकृति के विनाश का प्रमुख कारण बन रहा है। इंसान अपना जीवन मशीनों पर निर्भर करता जा रहा है जिनका निर्माण प्राकृतिक विनाश पर टिका हैं।

हम धरती को उजाड़ने पर क्यों तुले हुए हैं

इसी आधुनिकता और विलासिता की प्राप्ति की होड़ में हमने वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण, ग्रीन हाउस गैस जैसे खतरों को जन्म दे दिया है। ये खतरे भस्मासुर की तरह अब उसी का जीवन समाप्त करने में लग गए हैं जिसने इनको जन्म दिया हैं।

सभी प्रकार के प्रदूषणों ने मिलकर इंसानी जीवन को नरक बना दिया हैं और इंसान इतना गरीब एवं लाचार हो गया है कि उसे न तो स्वच्छ वायु मिल पा रही है और न ही स्वच्छ खाना पीना मिल पा रहा है।

बेतरतीब वाहनों की वृद्धि ने ध्वनि और वायु प्रदूषण को जन्म दिया हैं। वाहनों के शोरगुल से जो ध्वनि प्रदूषण हो रहा है उसके परिणामस्वरूप मानसिक बीमारियों ने इंसान को जकड़ लिया है।

वाहनों से निकलने वाले धुएँ में कार्बन के छोटे छोटे कण होते हैं और इसमें कई प्रकार की जहरीली गैसे जैसे सल्फर डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड आदि निकलती है जो वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण है। इस वायु प्रदूषण के कारण श्वांस सम्बन्धी लाइलाज बीमारियाँ हो रही है।

फैक्ट्रियां और कारखानें वायु और जल प्रदूषण दोनों फैला रहे हैं। इनकी चिमनियों से निकलने वाला धूम्र जिसमे जहरीली गैसें, कार्बन के कण आदि होते हैं जो वायुमंडल को प्रदूषित कर अम्ल वर्षा तथा ग्रीन हाउस गैस जैसी परिस्थितियों को जन्म देते हैं।

ग्रीन हाउस गैस प्रभाव की वजह से ओजोन गैस की परत समाप्त होती जा रही है जिसके फलस्वरूप सूर्य की पराबैंगनी किरणे सीधी हमारी त्वचा पर पड़कर बहुत से चर्म रोग फैला रही है जिनमे त्वचा का कैंसर भी शामिल है।

फैक्ट्रियों का रासायनिक अवशिष्ट सीधे नदी नालो में डाला जा रहा है जिससे जलीय जीव जंतु तो असमय मृत्यु को प्राप्त हो रहे हैं, इंसान भी नहीं बच पा रहा है।

इस रसायन युक्त जल को पीने के काम में लिया जा रहा है तथा इसी को फसल एवं सब्जियां उगानें के काम में लिया जा रहा है जिससे हमारे शरीर में बिना जरूरत के रसायनों का प्रवेश हो रहा है और हम कई प्रकार की घातक बिमारियों की चपेट में आ जाते हैं।

इन सभी प्रकार के प्रदूषणों के कारण कैंसर जैसी घातक बीमारी का जन्म हुआ हैं जिसका पूर्ण उपचार अभी तक नहीं खोजा जा सका है।

वन समाप्त हो रहे हैं और नदी, तालाब आदि विलुप्ति की कगार पर आ गए हैं जिससे जलीय तथा वन में रहने वाले बहुत से जीव जंतुओ की प्रजातियाँ तक समाप्त हो गई हैं। वनों की कटाई से वर्षा चक्र प्रभवित हो रहा है।

वायुमंडलीय तापमान में काफी बढ़ोतरी हो रही है जिससे गर्मी बढ़ रही है फलस्वरूप पहाड़ों की बर्फ असमय पिघलने से नदियों में जरुरत से ज्यादा पानी आ जाने के कारण बाढ़ आ जाती है। गाँव के गाँव तबाह हो जाते हैं और जनधन की काफी हानि होती है।

अब वक्त आ गया है कि हम सब मिलकर इन गलतियों को सुधारे अथवा जो यह गलतियां कर रहे हैं उसे रोकें। धरती को बचानें की जिम्मेदारी हम सब धरतीवासियों की ही है क्योकि धरती पर हम ही निवास करते हैं कोई दूसरे लोक से आकर धरती को नहीं बचाएगा।

जब हम धरती वासी ही इस दिशा में नहीं सोचेंगे तो ब्रह्माण्ड में कोई दूसरा इस बारे में क्यों सोचेगा। अगर हम यह सोचते हैं कि हम धरती को गन्दा करेंगे, प्रदूषण फैलाएगें तथा कोई ओर इस प्रदूषण को हटाएगा, गन्दगी साफ करेगा तो यह हमारी गलतफहमी है।

पृथ्वी को पृथ्वीवासियों की इस मानसिकता कि “हम न करे कोई और कर लेगा” से बहुत बड़ा खतरा है क्योंकि अगर इस मानसिकता को बदला नहीं गया तो ये पर्यावरण सब लोगो द्वारा बर्बाद कर दिया जायेगा। हमें इस मानसिकता से बाहर निकलकर लोगों की सोच को बदलना होगा तथा उन्हें शिक्षित करना होगा।

हमें लोगों को पर्यावरण संरक्षण के विषय में जागरूक करना होगा तथा उन्हें यह अहसास कराना होगा कि पर्यावरण संरक्षण हम सब की जिम्मेदारी है और यह किसी सरकार विशेष का कार्य नहीं है। बच्चों को स्कूलों और काँलेजों में पर्यावरण संरक्षण के विषय को पढ़ाना चाहिए।

पिछले कुछ वर्षो से हम “पृथ्वी दिवस” मनाते है तथा स्कूल और कॉलेजों में प्रतियोगिता आयोजित करके सबको इस बारे में सचेत कर रहे हैं। दुनिया भर की सरकारें मिलकर पर्यावरण और जीव जंतुओं के संरक्षण के लिए दिशा निर्देश बनाकर उन्हें लागू कर रही है।

अब लोगों में जागरूकता आने लगी है तथा कई बदलाव परिलक्षित होने लगे हैं। लोग पोलीथिन की थैलियों का प्रयोग कम से कम करने लगे हैं तथा गन्दगी न फैले इस ओर भी ध्यान देने लगे हैं। गन्दगी को नियमित साफ करवाया जाने लगा है तथा हर कहीं गन्दगी न फैलाने के सूचना पट्ट लगने लगे हैं।

सभी धरतीवासियों से यही अपेक्षा है कि हम लोग अपना अपना कर्तव्य निभाए और हमारी धरती को इन सब प्रदूषणनुमा भस्मासुरों से बचाकर मुक्त करवाएं।

अतः हम सब पृथ्वी वासियों को ये संकल्प लेना होगा कि ये सम्पूर्ण पृथ्वी हम सब की है तथा इसको साफ सुथरा रखने की जिम्मेदारी हम सभी की हैं।

हम धरती को उजाड़ने पर क्यों तुले हुए हैं? Why are we bent on destroying the earth?

Written by:
Ramesh Sharma

ramesh sharma smpr news

Search Anything in Rajasthan
SMPR News Top News Analysis Portal
Subscribe SMPR News Youtube Channel
Connect with SMPR News on Facebook
Connect with SMPR News on Twitter
Connect with SMPR News on Instagram

Post a comment

0 Comments