चौमू पुरोहितान ने बनाई वॉलीबॉल के क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

चौमू पुरोहितान ने बनाई वॉलीबॉल के क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर पर पहचान - सीकर जिले के श्रीमाधोपुर उपखण्ड का लगभग साढ़े तीन हजार की आबादी वाला छोटा सा गाँव चौमू पुरोहितान वॉलीबॉल के क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है।

पिछले दस वर्षों में यह गाँव महिला वॉलीबॉल खिलाडियों की खान बनकर उभरा है। पिछले दस वर्षों में इस गाँव ने देश की वॉलीबॉल टीम को दो इंटरनेशनल, 35 नेशनल और 50 से भी अधिक राज्यस्तरीय खिलाड़ी दिए हैं।

यहाँ की खिलाडियों की प्रतिभा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ की महिला टीम पूरे राजस्थान में सात साल तक अजेय रही है।

यहाँ की होनहार बेटियाँ राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में सफलता के झंडे गाड़ रही हैं तथा कई प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल विजेता रही है। सबसे रोचक बात तो यह रही है कि एक समय सीकर जिले की वॉलीबाल टीम की सभी खिलाड़ी इसी गाँव की बेटियाँ रही हैं।

वर्ष 2007 से पहले यहाँ के राजकीय माध्यमिक विद्यालय में केवल खो-खो ही खेला जाता था तथा वॉलीबॉल पर कोई ध्यान भी नहीं देता था।

गाँव की लड़कियों का वॉलीबॉल के प्रति रुझान तथा जुनून पैदा करने में शारीरिक शिक्षक (पीटीआई) रामगोपाल सामोता का सर्वाधिक योगदान रहा है। इन्होंने ही स्कूल में वॉलीबॉल एकेडमी स्थापित कर छात्राओं को वॉलीबॉल का प्रशिक्षण देना शुरू किया था।

धीरे-धीरे इनकी मेहनत रंग लाने लगी जब सीमित साधनों के बावजूद इस वॉलीबॉल अकैडमी की छात्राओं ने सफलता का परचम लहराना शुरू कर दिया। यहाँ महिला खिलाडियों ने अपने गुरू के साथ बहुत संघर्ष किया है परन्तु इन्होंने कभी भी अपना हौसला कमजोर नहीं होने दिया।

इसलिए इनकी सफलता को हौसलों की उड़ान भी कहा जा सकता है। साधनों का इतना अधिक अभाव रहा कि ये खिलाड़ी वर्ष 2007 से वर्ष 2009 तक या तो नंगे पैर या फिर केवल चप्पलों में वॉलीबॉल का अभ्यास करती थी।

इस टीम को पहली सफलता तब मिली जब इसने वर्ष 2009 में दौसा जिले में शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित अंडर 17 व 19 आयु की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।

इस जीत ने सभी लोगों का ध्यान इनकी तरफ आकर्षित किया तथा कुछ भामाशाहों ने खिलाडियों को जूते तथा अन्य खेल सामग्री उपलब्ध करवाई।

सुविधाओं के साथ इनका प्रदर्शन और सुधरता गया जिसके परिणामस्वरूप इन्होंने वर्ष 2009 से वर्ष 2013 तक शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित होने वाली सभी वॉलीबॉल प्रतियोगिताओं में विजेता का खिताब पाया।

इसी दौरान वर्ष 2009 से वर्ष 2016 तक राजस्थान खेल परिषद की ओर से आयोजित प्रतियोगिताओं में भी विजेता का खिताब पाया। लगातार सात वर्षों तक विजेता रहने के पश्चात वर्ष 2017 में यह टीम उपविजेता रही।

इसके अतिरिक्त वर्ष 2014 में नागपुर में मिनी नेशनल और वर्ष 2015 में यूपी के रामपुर में आयोजित प्रतियोगिता में भी कांस्य पदक प्राप्त किया।

यहाँ की कई खिलाडियों ने राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश तथा राज्य की तरफ से खेलकर अपने गाँव के साथ-साथ अपने जिले का भी नाम रोशन किया है।

अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी सरोज पीपलोदा पुत्री नानूराम ने वर्ष 2012 में चाइना, वर्ष 2014 में चीनी ताइपे और वर्ष 2015 में नेपाल में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत की तरफ से शिरकत की है।

दूसरी अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी अनिता नेहरा पुत्री कालूराम ने वर्ष 2014 में थाइलैण्ड में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत की तरफ से हिस्सा लिया।

सरोज तथा अनीता को राज्य सरकार की तरफ से बेस्ट खिलाडियों में भी शामिल कर सम्मानित भी किया गया था। सरोज पिपलोदा को सीकर जिले में बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान की ब्रांड एम्बेसडर भी बनाया गया था।

दुर्जनपुरा गाँव की रीतू बिजारणियां वर्तमान में राजस्थान वॉलीबॉल टीम की कप्तान है। रीतू भी चौमूं पुरोहितान गाँव के राजकीय माध्यमिक विद्यालय की वॉलीबॉल एकेडमी की खिलाड़ी रही हैं।

रीतू बिजारणियां को वर्ष 2017-18 में सवाई माधोपुर में आयोजित अंडर 19 वर्ग की जिला स्तरीय प्रतियोगिता में बेस्ट प्लेयर चुना गया।

जिस प्रकार हीरे की पहचान तथा उसको तराशने में जौहरी का बहुत बड़ा योगदान होता है ठीक उसी प्रकार किसी भी क्षेत्र में बिना पथ प्रदर्शक तथा प्रशिक्षक के सफलता मुश्किल होती है।

पथ प्रदर्शक के साथ-साथ प्रशिक्षक की भूमिका चौमूं पुरोहितान के राजकीय माध्यमिक विद्यालय के शारीरिक शिक्षक (पीटीआई) रामगोपाल सामोता ने बखूबी निभाकर इन छुपे हुए हीरों को पूर्ण लगन के साथ तराशा।

इन्होंने खिलाडियों के साथ-साथ खुद भी कड़ी मेहनत की है जिसका परिणाम आज सभी के सम्मुख है। इनकी इसी काबिलियत के बल पर इन्हें राष्ट्रपति सम्मान से भी पुरस्कृत किया जा चुका है।

आज गाँव में बिना सरकारी मदद के दस लाख की लागत से निर्मित सभी सुविधाओं से परिपूर्ण वॉलीबॉल कोर्ट मौजूद है। इसमें रात में खेलने के लिए फ्लड लाइट्स के साथ-साथ खिलाडियों की जरूरत की लगभग सभी सुविधाएँ मौजूद हैं।

यह विडम्बना ही है कि खिलाडियों के अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचने के पश्चात भी सरकार छोटा मोटा सम्मान देने के अतिरिक्त और कुछ नहीं कर रही है। केवल सम्मान तथा मैडल देने से ही सरकार की जिम्मेदारी पूरी नहीं होती है।

सरकार को इनकी प्रतिभा को ध्यान में रखते हुए इन्हें पर्याप्त सहायता उपलब्ध करवानी होगी। परन्तु सरकार सहायता उपलब्ध करवाने के बजाए इनकी स्कालरशिप को घटाकर इनके हौसलों को तोड़ने का कार्य ही कर रही है।

गौरतलब है कि कांग्रेस सरकार की तरफ से इन्हें एक लाख रूपए की स्कालरशिप मिलती थी जिसे बीजेपी सरकार ने घटाकर मात्र तीस हजार कर दिया है।

सरकार को इनकी स्कालरशिप को आज के परिप्रेक्ष्य में तर्कसंगत बनाना होगा ताकि ये खिलाड़ी अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भारत का सही ढंग से प्रतिनिधित्व कर सके वर्ना इस देश में ऐसे भी खिलाडियों की कमी नहीं है जिन्हें मुफलिसी में अपने मैडल तक बेचने पड़े हैं।

चौमू पुरोहितान ने बनाई वॉलीबॉल के क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर पर पहचान Chomu Purohitan made national recognition in the field of volleyball

Written by:
Ramesh Sharma

ramesh sharma smpr news

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