श्रीमाधोपुर में गंभीर होती पेयजल समस्या

श्रीमाधोपुर में गंभीर होती पेयजल समस्या - एक समय ऐसा था जब श्रीमाधोपुर कस्बे में बावड़ी स्थित केवल एक ही पानी की टंकी से पूरे कस्बे में पानी की सप्लाई होती थी तथा सभी लोगों को पर्याप्त मात्र में पानी उपलब्ध हो जाता था। नल सुबह तथा शाम अच्छे प्रेशर के साथ आया करता था।

श्रीमाधोपुर में गंभीर होती पेयजल समस्या

आज कस्बे में पेयजल की बड़ी विकट समस्या है। पानी की एक टंकी के स्थान पर अनेक टंकियाँ बन गई है परन्तु कस्बेवासियों को पेयजल के लिए रोजाना तरसना पड़ता है।

अधिकतर क्षेत्र में पानी एक दिन छोडकर एक दिन के अंतराल से आता है तथा उसमे भी उसका प्रेशर इतना कम रहता है कि लोग नल के आते ही पाइपलाइन में हैंडपंप लगाकर पानी के लिए जूझते नजर आते हैं।

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हर सुबह सभी घरों के बाहर घर के किसी एक सदस्य की ड्यूटी हैंडपंप से पानी खींचने की लग जाती है। पानी की सप्लाई के समय बिजली विभाग द्वारा नियमित रूप से बिजली की कटौती कर दी जाती है जिससे लोग कथित तौर पर बिजली की मोटर से पानी नहीं खींच पाते हैं।

हैंडपंप से या इन्वर्टर से पानी खींचना एक मजबूरी बन गया है क्योंकि अधिकतर जगह बिना किसी अतिरिक्त साधन के अपने आप नल में पानी आता ही नहीं है.

श्रीमाधोपुर में गंभीर होती पेयजल समस्या

आखिर क्या कारण है कि पिछले दस बारह वर्षों से भी अधिक समय से लोगों को पेयजल की इस बड़ी समस्या से अभी तक राहत नहीं मिली है। क्षेत्र के लोगों ने इस समस्या को लेकर कई बार आंदोलन भी किया है परन्तु जिम्मेदार लोगों के कानों पर जूँ तक नहीं रेंगती है।

क्षेत्र के नेता भी सिवाय कुम्भाराम लिफ्ट परियोजना के सब्जबाग तथा आश्वासन के कुछ नहीं दे रहे हैं। भोली भाली जनता इन आश्वासनों पर भरोसा करके चुप हो जाती है।

जिम्मेदार नेता कहते हैं कि कुम्भाराम लिफ्ट योजना के दूसरे फेज का सर्वे चल रहा है तथा सर्वे के बाद पानी आने से इस समस्या का स्थाई समाधान हो जाएगा।

भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सुराज सकल्प यात्रा के दौरान इस योजना को खूब भुनाया था तथा पाँच वर्ष सत्तासीन रहने के बाद भी बीजेपी की सरकार ने इस योजना के लिए सर्वे तक नहीं करा पाई है।
भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सुराज सकल्प यात्रा के दौरान इस योजना को खूब भुनाया था तथा पाँच वर्ष तक सत्तासीन रहने के बाद भी बीजेपी की सरकार इस योजना के लिए सर्वे तक नहीं करा पाई है।

जिस प्रकार पिछले पाँच वर्ष बीजेपी की सरकार के साथ-साथ स्थानीय विधायक झाबर सिंह खर्रा भी सत्तारूढ़ पार्टी के ही थे उसी प्रकार पिछले एक वर्ष से कांग्रेस की सरकार के साथ स्थानीय विधायक दीपेन्द्र सिंह शेखावत भी कांग्रेस पार्टी के ही हैं।

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यह श्रीमाधोपुर की जनता की बदकिस्मती ही कही जाएगी कि प्रदेश में सरकार चलने वाली पार्टी का विधायक होने के बाद भी जनता पेयजल के लिए जूझ रही है।

भारत की जनता अपने अधिकारों के लिए अधिक सजग नहीं है। यह कभी अपने अधिकारों की मांग को पुरजोर तरीके से नहीं उठाती है। यह अपनी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए भी विरोध करना पसंद नहीं करती है।

जनता को यह याद रखना चाहिए कि मांगने से ही कुछ मिलता है। कुछ भी नहीं मांगना संतुष्टि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। अगर जनता चुप है इसका मतलब, जनता संतुष्ट है।

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अगर जनता बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर अपनी जरूरतों और परेशानियों को नहीं बताएगी तो फिर इसका सीधा सा सन्देश यही है कि जो कुछ चल रहा है वह सब अच्छा है।

अमूमन राजनीनि में सत्ता प्राप्ति के लिए वादों का सहारा लिया जाता है। जनता की कमजोर याददाश्त की वजह से, हर चुनाव में उन्ही वादों को दोहराया जाता है जो पिछले कार्यकाल में पूरे नहीं हुए। पुरानी दाल में नया तड़का लगाकर पेश कर दिया जाता है।

श्रीमाधोपुर में गंभीर होती पेयजल समस्या

जनता को समझना होगा कि राजनेताओं से किसी भी कार्य को अपने वोट की ताकत को दिखाकर ही करवाया जा सकता है। जनता को एकजुट होकर, दलगत राजनीति की जालसाजी से निकलकर, अपने मताधिकार का उपयुक्त प्रयोग और अधिक प्रभावशाली तरीके से कर अपनी मांगों को मनवाना होगा।

श्रीमाधोपुर की जनता को यह तय करना होगा कि वोट सिर्फ घोषणा करके उन्हें कार्यान्वित करने वाले उम्मीदवारों को ही देना है न कि सिर्फ घोषणा करके भूल जाने वाले नेताओं को।

गौरतलब है कि पूर्व में पेयजल की समस्या को दूर करने के लिए वर्ष 2028 तक की अभिकल्पित आबादी के आधार पर 923.44 लाख की लागत से शहरी जल प्रदाय योजना के तहत नाथूसर की नदी से पेयजल लाने की योजना बनाई थी। अब यह योजना भी पूरी हो गई है परन्तु पानी की समस्या अभी भी जस की तस बनी हुई है।

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पूर्ण हुई इस योजना के तहत 25.47 लाख रुपए की लागत से नाथूसर नदी पर 200 एम.एम. व्यास क्षमता के सात नए नलकूप जल स्त्रोत बनाए गए है। योजना के तहत 94.62 लाख रूपए में नाथूसर नदी पर 210 किलो लीटर क्षमता तथा कोर्ट जोन में 330 किलो लीटर क्षमता के दो जलाशय व दिगम्बर आश्रम में 450 किलो लीटर क्षमता तथा वार्ड नंबर पांच बिज्यावाली में 140 लीटर क्षमता के दो उच्च जलाशय बनाए गए है।

नाथूसर नदी से ग्यारह ट्यूबवैल का पानी पेयजल के लिए लाया गया है तथा 31 थ्री फैस नलकूप व 8 सिंगल फैस नलकूपो की व्यवस्था होने के बाद भी कस्बे में एक दिन छोडकऱ एक दिन पानी की सप्लाई एक चिंतनीय विषय है।

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Written by:
Ramesh Sharma


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