अवैध अतिक्रमण तथा ट्रैफिक जाम का पर्याय बनता श्रीमाधोपुर कस्बा

अवैध अतिक्रमण तथा ट्रैफिक जाम का पर्याय बनता श्रीमाधोपुर कस्बा - श्रीमाधोपुर कस्बे का इतिहास लगभग 250 वर्ष पुराना है। इतने पुराने इतिहास को अपने आगोश में समेटे यह शहर नित नए परिवर्तन देखते हुए आगे बढ़ रहा है।

व्यापारिक रूप से तो यह शहर प्रारंभ से ही संपन्न रहा है। बर्तनों तथा कपड़ों का व्यापार यहाँ बहुत फूला फला है परन्तु समय के परिवर्तन ने बहुत कुछ बदल दिया है।

अवैध अतिक्रमण तथा ट्रैफिक जाम का पर्याय बनता श्रीमाधोपुर कस्बा

अनाज मंडी की स्थापना ने कस्बे के आस पास के क्षेत्र के किसानों के लिए अपनी फसल को बेचने लिए एक बहुत ही बेहतरीन मंच उपलब्ध करवाया था। इस अनाज मंडी की वजह से कस्बे की व्यापारिक रूप से भी काफी अधिक प्रगति हुई।

एक समय श्रीमाधोपुर अनाज मंडी जौ की फसल में एशिया की सबसे बड़ी मंडी के रूप में गिनी जाती थी। श्रीमाधोपुर रोडवेज बस डिपो की स्थापना नब्बे के दशक में हुई परन्तु रोडवेज का केन्द्रीय बस स्टैंड उसके अनेक वर्षों के पश्चात बड़े इन्तजार के पश्चात बना।

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श्रीमाधोपुर में राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के केन्द्रीय बस स्टैंड का शुभारम्भ 21 दिसम्बर 2011 को तत्कालीन विधानसभाध्यक्ष एवं श्रीमाधोपुर के एमएलए श्री दीपेन्द्र सिंह शेखावत की अध्यक्षता में कस्बे के बीचों बीच नगरपालिका भवन के बगल वाली भूमि पर हुआ।

यह बस स्टैंड आमजन की सुविधाओं के लिए बना था परन्तु यह स्वयं ही कई प्रकार की अव्यवस्थाओं से ग्रसित हो गया है। इन अव्यवस्थाओं में सर्वप्रमुख है रोडवेज बस स्टैंड का निजी टैक्सी स्टैंड बन जाना। आज यह बस स्टैंड, निजी तथा वाहन जो टैक्सी के रूप में चलते हैं, उनकी अवैध पार्किंग स्थली बनता जा रहा है।

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नियमानुसार रोडवेज बस स्टैंड पर रोडवेज की बसों के अतिरिक्त अन्य किसी वाहन की पार्किंग नहीं होनी चाहिए परन्तु इसे रोडवेज प्रशासन की अकर्मण्यता कहा जाए या फिर पार्किंग करने वालों का दुस्साहस, कि बस स्टैंड परिसर में नो पार्किंग का बोर्ड लगा होने के बावजूद भी यहाँ वाहन अवैध रूप से पार्क होते हैं।

सोचने वाली बात तो यह है कि रोडवेज बस स्टैंड परिसर में ही स्थानीय पुलिस चौकी स्थित है परन्तु फिर भी यहाँ वाहन अवैध रूप से खड़े रहकर यातायात को अवरुद्ध करते रहते हैं।

क्या स्थानीय पुलिस की यह जिम्मेदारी नहीं बनती है कि वह बस स्टैंड को अवैध पार्किंग से मुक्त करवाए? एक तो इस बस स्टैंड में पहले ही स्थान की काफी कमी है उस पर अवैध पार्किंग की वजह से वो स्थान भी समाप्त हो जाता है।

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बस स्टैंड के बगल में नगरपालिका स्थित है परन्तु फिर भी यह अन्दर तथा बाहर दोनों तरफ से निजी वाहनों की शरण स्थली बनी हुई है। कस्बे की मुख्य सड़क पर हमेशा जाम लगा रहता है तथा गलियों की की हालत तो यह है कि वहाँ से एक जीप तथा एक दुपहिया वाहन का भी निकलना मुश्किल हो जाता है। बहुत बार तो दुपहिया वाहनों का निकलना भी मुश्किल हो जाता है।

अक्सर यहाँ पर जाम की स्थिति बनी रहती है तथा यात्रियों को आवागमन में अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। अमूमन रोडवेज बस स्टैंड के मुख्य दरवाजे पर कोई न कोई निजी वाहन जैसे बस या जीप आदि खड़े रहते हैं जिनकी वजह से रोडवेज बसों को आने जाने में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है।

अवैध अतिक्रमण तथा ट्रैफिक जाम का पर्याय बनता श्रीमाधोपुर कस्बा

जाम तथा यातायात की अवरुद्धता की स्थिति यह अकेले बस स्टैंड में या उसके आस पास ही नहीं है बल्कि यह स्थिति सम्पूर्ण श्रीमाधोपुर कस्बे की है फिर चाहे वह चौपड़ बाजार हो, रींगस बाजार हो, सब्जी मंडी हो, सरकारी हॉस्पिटल हो, गौशाला हो या फिर उपखंड अधिकारी कार्यालय हो

 सब्जी मंडी वाली सड़क तथा फैंसी बाजार वाली सड़क में तो इतना अस्थाई अतिक्रमण है की वहां तो पैदल चलना भी दूभर हो जाता है तथा कार का निकलना तो असंभव सा प्रतीत होता है।

फैंसी बाजार की सड़क को तो व्यापारियों ने ही स्वयं अपनी निजी संपत्ति की तरह बना रखा है तथा पूरी गली को साड़ियों तथा कपड़ों से पूरी तरह ढक कर अवरुद्ध कर रखा है।

अवैध अतिक्रमण तथा ट्रैफिक जाम का पर्याय बनता श्रीमाधोपुर कस्बा

अवैध अतिक्रमण तथा ट्रैफिक जाम का पर्याय बनता श्रीमाधोपुर कस्बा

अभी हाल ही में माननीय न्यायालय के आदेश की पालना हेतु नगरपालिका ने अखबारों में सार्वजनिक सूचना प्रकाशित कर अवैध निर्माण तोड़ने की बात कही है तथा लोगों को अपना अवैध निर्माण सात दिन के अन्दर तोड़ने के लिए कहा गया है।

परन्तु इस सूचना को भी प्रश्नात्मक दृष्टि से देखा जा रह है तथा लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर नगरपालिका की ऐसी क्या मजबूरी है कि वह शनि मंदिर से लेकर रेलवे स्टेशन तक के अवैध निर्माण क्यों नहीं तोड़ रही है।

कस्बे में बीसियों शौपिंग काम्प्लेक्स खुल गए हैं परन्तु अगर एक दो को छोड़ दिया जाये तो अन्य किसी में भी पार्किंग स्थल का अभाव है जिनकी वजह से सड़क पर अवैध पार्किंग होती है और यातायात अवरुद्ध होता है। अधिकतर काम्प्लेक्स गलियों में स्थित है जिनमें से अधिकतर गलियों की चौड़ाई बमुश्किल दस बारह फीट की होगी।

यह एक सोचने तथा रिसर्च का विषय है कि बिना पार्किंग स्थल के इन शौपिंग कोम्प्लेक्सेस को नगरपालिका द्वारा अनुमति कैसे मिल गई? क्या ये सभी शौपिंग कोम्प्लेक्सेस पूर्णतया नियमों की पालना करते हुए बनाये गए हैं? अगर हाँ तो फिर क्या बिना पार्किंग स्थल के शौपिंग काम्प्लेक्स वैध होता है?

क्या आपने श्रीमाधोपुर के इस तालाब की सैर की है?

हम सभी को एक बात अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिए कि किसी भी शहर तथा कस्बे में जब तक मार्ग तथा गलियाँ यातायात के लिए अनुकूल नहीं होंगी तब तक उसका विकास होना असंभव है। आज श्रीमाधोपुर कस्बे की हालत यह है कि यह कस्बा वो कस्बा प्रतीत ही नहीं होता जिसे 250 वर्ष पूर्व खुशाली राम बोहराजी ने बसाया था।

यह आम जनता की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह अवैध अतिक्रमण को बढ़ावा न दे तथा सुगम यातायात में सहायक बनकर कस्बे की प्रगति में सहायक बने।

अवैध अतिक्रमण तथा ट्रैफिक जाम का पर्याय बनता श्रीमाधोपुर कस्बा Illegal encroachment and traffic jams in Shrimadhopur

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Written by:
Ramesh Sharma

ramesh sharma smpr news

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