श्रीमाधोपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे

श्रीमाधोपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे - श्रीमाधोपुर विधानसभा, सीकर जिले का एक प्रमुख विधानसभा क्षेत्र है। वर्तमान में यहाँ से कांग्रेस पार्टी के दीपेन्द्र सिंह शेखावत विधायक हैं। अक्सर इस विधानसभा क्षेत्र में एकांतर रूप से भारतीय जनता पार्टी तथा कांग्रेस के उम्मीद्वार ही विधायक चुने जाते रहे हैं।

श्रीमाधोपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे

इस क्षेत्र में इन दोनों बड़ी पार्टियों के अतिरिक्त अन्य किसी पार्टी के वर्चस्व की तो बात ही क्या, अस्तित्व तक नहीं है। जैसे सम्पूर्ण राजस्थान अभी अन्य क्षेत्रीय दलों के प्रभाव से अछूता है ठीक उसी प्रकार श्रीमाधोपुर विधानसभा क्षेत्र भी अभी तक अन्य क्षेत्रीय दलों के उदय से बचा हुआ है।

दोनों पार्टियों को पता है कि यहाँ एक तरह से अघोषित परिपाटी सी चली आ रही है कि एक बार एक पार्टी का उम्मीद्वार विजयी होता है तो दूसरी बार दूसरी पार्टी का उम्मीद्वार विजयी होता है।

कई दशकों से लगभग यही क्रम दोहराया जाता रहा है। इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के दीपेन्द्र सिंह शेखावत तथा भारतीय जनता पार्टी के झाबर सिंह खर्रा सक्रिय हैं।

श्रीमाधोपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे

जैसा की अक्सर होता है कि दोनों ही पार्टियों के उम्मीद्वार चुनाव लड़ने के समय बड़े-बड़े वादे करते हैं परन्तु विजयी हो जाने के पश्चात उन वादों को ताक पर रख दिया जाता है।

जन समस्याओं का निराकरण करने की जगह सम्पूर्ण कार्यकाल में सिर्फ भाषण तथा उद्घाटन ही संपन्न किए जाते हैं। इन सबकी वजह जनता की कमजोर याददाश्त तथा जातिगत समीकरण है।

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ऐसा लगता है कि कांग्रेस के दीपेन्द्र सिंह शेखावत ने तो अपना प्रमुख कार्य क्षेत्र श्रीमाधोपुर की जगह अजीतगढ़ को बना लिया है। ये विधानसभा क्षेत्र मुख्यालय पर अपनी उपस्थिति कम से कम दर्ज करवाते हैं तथा अपनी लगभग सभी गतिविधियाँ यही से संपन्न करते हैं।

ऐसा प्रतीत होता है कि इनके द्वारा आगामी विधानसभा चुनावों में श्रीमाधोपुर से अधिक प्रमुखता अजीतगढ़ को मिलेगी। कारण सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक तथा वोट बैंक को साधने का ही हो सकता है। वैसे यह राजनेताओं का निजी मामला है कि वे चुनाव में किस जगह को अधिक प्रधानता दें।
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आजादी के लगभग 70 वर्षों पश्चात भी श्रीमाधोपुर कस्बा मूलभूत सुविधाओं को तरस रहा है। नेताओं द्वारा यहाँ सिर्फ वादे किए जाते हैं परन्तु उन्हें निभाया नहीं जाता है फिर चाहे नेता विधानसभा स्तर के हों या फिर नगर पालिका स्तर के। श्रीमाधोपुर की जनता अपने कर्तव्यों के प्रति तो उदासीन है ही, अपने अधिकारों के प्रति भी पूर्ण रूप से उदासीन है।

जनता की नेताओं तथा प्रशासन से कोई भी मांग गंभीरतापूर्वक रही ही नहीं। क्षेत्र की कुछ समस्याओं को इस लेख के माध्यम से उठाया जा रहा है तथा उम्मीद है कि जिम्मेदार लोग इन्हें गंभीरता से लेकर इनके निराकरण का प्रयास करेंगे।

पेयजल की समस्या

श्रीमाधोपुर क्षेत्र दशकों से पेयजल की समस्या से जूझ रहा है। यहाँ पेयजल की बड़ी भारी किल्लत है। बहुत से क्षेत्र में नल द्वारा पानी एक दिन के अन्तराल पर उपलब्ध करवाया जा रहा है।

इस नल के पानी में इतना कम प्रेशर होता है कि वह बिना हैंडपंप चलाए नहीं प्राप्त होता है। जब भी नल से पानी आता है तब लगभग सभी घरों के नलों में हैंडपंप चलना शुरू हो जाते हैं। यह दैनिक तथा नियमित नजारा है।

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पेयजल की व्यवस्था के लिए दस करोड़ रुपये की लागत से नाथूसर की नदी से पाइप लाइन डालकर पानी उपलब्ध करवाने के बड़े-बड़े दावे किए गए परन्तु सभी दावे गलत साबित हुए। पेयजल के मामले में जो स्थिति पाइप लाइन डालने से पहले थी लगभग वही आज है। पता नहीं दस करोड़ रूपए की रकम कौनसे पाइप लाइन में बह गई।

अब पेयजल के नाम पर जनता को कुम्भाराम लिफ्ट परियोजना का लॉलीपॉप दिया जा रहा है। मजे की बात यह है कि जनता इस लॉलीपॉप को आनंद के साथ चूस भी रही है।

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इस परियोजना से सम्बंधित सभी कार्य संपन्न होकर इसे अभी तक धरातल पर उतर जाना चाहिए था परन्तु उसकी जगह अभी तक तो इसके क्रमपूर्ण चरणों के फीते ही काटे जा रहे हैं।

वर्तमान विधानसभा की शुरुआत में किए गए वादे कार्यकाल पूर्ण होने तक भी संपन्न नहीं हुए हैं। यह जनता की जागरूकता में कमी तथा नेताओं की वादा करके भूल जाने की प्रवृत्ति की वजह से होता है।

अतः श्रीमाधोपुर वासियों के लिए सर्वप्रथम चुनावी मुद्दा पेयजल की सुचारू व्यवस्था का उपलब्ध होना है।

अतिक्रमण की समस्या

क्षेत्र की दूसरी बड़ी समस्या अवैध अतिक्रमण की है। पूरा श्रीमाधोपुर कस्बा अतिक्रमण की चपेट में है। गलियों की तो बात ही क्या करें, मुख्य मार्गों पर भी अतिक्रमण की भरमार है।

ट्रैफिक के अन्दर मुख्य मार्गों की चौड़ाई इतनी भी नहीं रह पाती है कि दो बसें एक दूसरे के सामने से निकल जाए। गलियों की चौड़ाई तो इतनी भी नहीं है कि एक कार तथा एक बाइक भी आमने सामने से निकल जाए।

श्रीमाधोपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे

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फैंसी मार्किट की गलियों में तो इतना अधिक अतिक्रमण है कि दुकानदारों ने पूरी की पूरी गलियों पर कब्जा कर रखा है। कार का निकलना तो दूर, एक दुपहिया वाहन को निकलने में भी समस्या आती है। व्यापारियों ने पूरी गली को साड़ियों तथा कपड़ों से ढककर पाट रखा है।

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पिछले कुछ वर्षों से कस्बे में अवैध तथा बिना अनुज्ञा के शौपिंग कॉम्प्लेक्सों की बाढ़ सी आ गई है। दस दस फिट की चौड़ाई वाली गलियों में भी तीन तीन मंजिला व्यावसायिक भवन बनाकर उन्हें शुरू किया गया है। इन भवनों में सुरक्षा तथा जन सुविधाओं का पूर्णतया अभाव है।

एक दो में औपचारिकतावश थोडी सी जगह पार्किंग के लिए छोड़ी गई है तथा अन्य सभी में तय मानकों के अनुसार पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। बिना पार्किंग की व्यवस्था के ग्राहकों के वाहन गलियों में बेतरतीब तरीके से खड़े रहते हैं जिनके कारण सारे दिन यातायात व्यवस्था बाधित रहती है।

श्रीमाधोपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे

पूरे श्रीमाधोपुर में एक दो गलियों के अतिरिक्त किसी भी गली की चौड़ाई इतनी नहीं है कि उसमे 108 एम्बुलेंस आसानी से घुस जाए। फायर ब्रिगेड की गाड़ी की तो गली में जाने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। आखिर सडकों की चौड़ाई इतनी तो होनी ही चाहिए कि जिनमे दो फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ बड़े आराम से जा सकें।

हादसे तथा दुर्घटनाएँ कभी भी कहकर नहीं होते हैं। अगर भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना हो जाती है तथा उस समय फायर ब्रिगेड अपना कार्य नहीं कर पाई तब उस नाकामी की जिम्मेदारी कौन लेगा?

क्या आपने श्रीमाधोपुर के इस तालाब की सैर की है?

कस्बेवासी अतिक्रमण को बढ़ावा देकर अपने स्वास्थ्य तथा सुरक्षा के साथ समझौता कर रहे हैं। ऐसी गलियों में रहने से क्या फायदा जहाँ जरूरत के समय एम्बुलेंस तथा फायर ब्रिगेड भी नहीं पहुँच पाए। अपनी जिम्मेदारी को निभाने में नगरपालिका प्रशासन भी पूर्णतया नाकाम रहा है।

कस्बे वासियों के लिए दूसरा चुनावी मुद्दा अवैध अतिक्रमण से मुक्ति का होना चाहिए।

सरकारी महाविद्यालय की जरूरत

श्रीमाधोपुर उपखंड पर विद्यार्थियों के लिए एक भी सरकारी महाविद्यालय उपलब्ध नहीं है। क्षेत्र के विद्यार्थियों को अपनी उच्च शिक्षा के लिए नीमकाथाना, चिमनपुरा, सीकर या जयपुर की तरफ प्रस्थान करना पड़ता है। इस वजह से विद्यार्थियों के परिवार पर बेवजह आर्थिक भार बढ़ता है।

बहुत से अभिभावक अपने बच्चों को दूसरे शहरों में भेजकर पढाई का खर्च उठाने में सक्षम नहीं होते हैं फलस्वरूप इन विद्यार्थियों की पढाई बीच में ही छूट जाती है। यह परेशानी मुख्यतया लड़कियों तथा ग्रामीण परिवारों के साथ अधिक है।

श्रीमाधोपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे

क्षेत्र में निजी महाविद्यालयों की भरमार है परन्तु निजी महाविद्यालय की फीस तथा सरकारी महाविद्यालय की फीस में जमीन आसमान का अंतर होता है। गरीब विद्यार्थी निजी महाविद्यालयों की मोटी फीस चुका पाने में असक्षम होते हैं। वैसे भी शिक्षा का निजीकरण सेवा के लिए न होकर धन कमाने का जरिया मात्र बन गया है।

श्रीमाधोपुर में लम्बे समय से सरकारी महाविद्यालय शुरू करने मांग की जा रही है परन्तु नेताओं की उदासीनता की वजह से यह मांग भी पूरी नहीं हो पा रही है। किसी भी समाज के लिए शिक्षा तथा स्वास्थ्य ही प्रमुख प्राथमिकताओं में होते हैं।

अतः सभी क्षेत्रवासियों के लिए सरकारी महाविद्यालय की मांग तीसरा प्रमुख मुद्दा होना चाहिए।

विरासत का संरक्षण

विरासत वह धरोहर होती है जो हमें हमारे पुरखों से जोडती है। इससे हमें हमारी पुरातन सभ्यता तथा संस्कृति की समृद्धता का परिचय होता है। धरोहर हमारे पुरखों की वो निशानी होती है जिसके माध्यम से हम उन्हें अपने करीब पाते हैं। धरोहर हमारा अलिखित इतिहास होता है।

श्रीमाधोपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे

श्रीमाधोपुर में धरोहर के नाम पर एकमात्र ऐतिहासिक बावड़ी मौजूद है। परन्तु जैसे अन्य सभी क्षेत्रों में प्रशासन तथा जनता उदासीन है ठीक इसी प्रकार विरासत के संरक्षण में भी उदासीन हैं। यह बावड़ी इतनी भव्य तथा ऐतिहासिक है कि राजस्थान सरकार द्वारा प्रकाशित सितम्बर 2017 की सुजस में भी इसका जिक्र किया गया है।

राजस्थान सरकार द्वारा प्रकाशित सितम्बर 2017 की सुजस यहाँ देखें

यहाँ “दीया तले अँधेरा” होने की बात पूर्णतया सत्य प्रतीत होती है। प्रशासन की उदासीनता की वजह से आज इस बावड़ी का अस्तित्व समाप्ति की और है। लोगों ने इसे कूड़ाघर बना दिया है। बावड़ी आश्रम का कचरा भी इसी बावड़ी का अस्तित्व समाप्ति में सहायक बनता जा रहा है। आश्रम द्वारा इसके मुख्य रस्ते को कचरे द्वारा बाधित कर दिया गया है।

श्रीमाधोपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे

ऐसा नहीं है कि इस धरोहर के प्रति सभी श्रीमाधोपुर वासी ही उदासीन हैं। कुछ वर्षों पूर्व जनसहयोग द्वारा इस बावड़ी की सफाई की गई थी परन्तु यह कार्य आगे नहीं बढ़ पाया। कुछ लोगों ने इसे जर्जर तथा आमजन के लिए खतरनाक बताकर यह कार्य रुकवा दिया।

लोगों से बात करने पर कुछ लोग दबी जुबान में यह स्वीकार करते हैं कि कुछ लोग इस बावड़ी के अस्तित्व को समाप्त कर इसकी बेशकीमती जमीन को हडपना चाहते हैं। यह बात पूर्णतया प्रमाणिक नहीं है परन्तु यह एक जाँच का विषय हो सकता है।

लोगों को समझना होगा कि अगर यह बावड़ी संरक्षित होकर अपने पुराने स्वरुप में लौटती है तो इससे श्रीमाधोपुर की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बनती है क्योंकि किसी भी क्षेत्र की पहचान उसकी धरोहर ही होती है।

अतः इस धरोहर का पुनर्निर्माण भी चुनावों का प्रमुख मुद्दा होना चाहिए।

सीवरेज की जरूरत

किसी भी कस्बे तथा शहर के लिए स्वच्छता प्रमुख जरूरत होती है। वैसे भी स्वच्छ भारत अभियान प्रधानमंत्री की प्रमुख योजनाओं में से प्रमुख है। स्वच्छता का सीधा-सीधा सम्बन्ध स्वास्थ्य से होता है। स्वच्छता के लिए कचरे का उचित निस्तारण बहुत आवश्यक है।

इसी क्रम में सीवरेज भी शहर की एक प्रमुख आवश्यकता है। सीवरेज की वजह से सफाई व्यवस्था काफी सुगम हो जाती है तथा हर कहीं गंदगी होने से बचा जा सकता है।

क्षेत्रवासियों के लिए चुनावों का चौथा मुद्दा सीवरेज का होना चाहिए।

सार्वजनिक पार्क की जरूरत

स्वास्थ्य इंसान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल होता है। अगर मनुष्य अपनी जीवन चर्या में थोडा बहुत व्यायाम शामिल कर ले तो वह डाक्टरों के अनावश्यक चक्कर काटने से बच जाता है। हल्के फुल्के व्यायाम, मोर्निंग वाक तथा बच्चों के खेलने के लिए पार्क से बढ़कर अन्य कोई विकल्प नहीं हो सकता है।

श्रीमाधोपुर कस्बे की जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए एक पार्क की मांग जायज प्रतीत होती है। नगरपालिका प्रशासन को इस मांग पर ध्यान देकर कोई जगह चुननी चाहिए। क्षेत्र के विधायक को भी इस दिशा में प्रयास करना चाहिए।

सार्वजानिक पार्क की मांग चुनावों में पाँचवा प्रमुख मुद्दा हो सकता है।

वैसे तो क्षेत्र के सम्बन्ध में अनेक मुद्दे हैं परन्तु आज के इस लेख में बस इतना ही काफी है। क्षेत्र के सभी नेताओं से अनुरोध है कि वे जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेकर उनका शीघ्रता से निराकरण करें।
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श्रीमाधोपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे Major issues of Shrimadhopur constituency

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Written by:
Ramesh Sharma


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