क्यों नहीं है मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना में बावड़ी का नाम

क्यों नहीं है मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना में बावड़ी का नाम - श्रीमाधोपुर की प्राचीन बावड़ी जिसे सीताराम बाबा की बावड़ी के नाम से भी जाना जाता है, आज श्रीमाधोपुर वासियों द्वारा ही उपेक्षित हो रही है।

लगभग 250 वर्ष पुरानी यह बावड़ी किसी समय अत्यंत भव्य रही है परन्तु आज यह अपनी बदहाली पर आँसू बहा रही है। श्रीमाधोपुर वासी उदासीन होकर इसे अनदेखा कर रहे हैं तथा इसे कूड़ादान बनाकर प्रसन्न हो रहे हैं।


हमारे जिन पूर्वजों ने इस बावड़ी का निर्माण करवाया था, क्या इसकी दुर्दशा देखकर उनकी आत्माएँ प्रसन्न होंगी। कहने को तो बहुत नामी गिरामी लोग श्रीमाधोपुर में रहते हैं, परन्तु ऐसा लगता है कि जैसे सभी ने इस विरासत को नेस्तनाबूद करने की मूक सहमती दे रखी है।

मुख्यमंत्री जन स्वावलंबन योजना के अंतर्गत राजस्थान के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों की अनेक बावडियों का संरंक्षण तथा पुनर्निर्माण हुआ है फिर यह भव्य बावड़ी उपेक्षित क्यों है? क्या यह राजनेताओं तथा नागरिकों की उदासीनता का जीवंत सबूत नहीं है?

राजस्थान सुजस का सितम्बर 2017 का अंक यहाँ देखें

इस सम्बन्ध में ना तो नगरपालिका स्तर पर और ना ही विधानसभा स्तर पर किसी का ध्यान है। आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार नगरपालिका की इस बावड़ी के सम्बन्ध में किसी प्रकार की कोई भी योजना नहीं है।

विरासत के नाम पर श्रीमाधोपुर वासियों के पास एकमात्र यही बावड़ी ही है जिसका जिक्र राजस्थान सरकार द्वारा प्रकाशित पत्रिका सुजस के सितम्बर 2017 अंक के पेज नंबर 49 पर भी है। अगर हम अपनी इस विरासत को नहीं बचा पाते हैं तो फिर किसी का भी प्रभावशाली होना किसी काम का नहीं है।

श्रीमाधोपुर की ऐतिहासिक बावड़ी के जीर्णोद्धार के लिए मुख्यमंत्री से मांग

अपनी विरासत का संरक्षण एक सभ्य समाज की प्रथम प्राथमिकता होती है तथा हमारी भी यही होनी चाहिए। विरासत के लिए लोग अपने जीवन को दाव पर लगा देते हैं तो क्या हम थोडा बहुत समय भी नहीं लगा सकते।

क्यों नहीं है मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना में बावड़ी का नाम

श्रीमाधोपुर डॉट कॉम ने अपने स्तर पर इस कार्य को कर रहा है तथा कुछ हद तक इसमें सफलता भी पाई भी है और उम्मीद करते हैं कि वह दिन दूर नहीं होगा कि जब यह बावड़ी अपने पुराने स्वरुप में लौट आएगी। परन्तु फिर भी सम्मिलित प्रयास आवश्यक है क्योंकि संगठन में ही शक्ति होती है।

हम लोगों को शायद यह समझ में ही नहीं आ रहा है कि इस बावड़ी के नष्ट हो जाने से हम क्या खों देंगे। अतः वे सभी लोग जो इस सम्बन्ध में कुछ कर सकते हैं सक्रिय रूप से अपना प्रयास करें तथा इस धरोहर को बचाने में सहयोग दें।

श्रीमाधोपुर की ऐतिहासिक कायथवाल बावड़ी

क्यों नहीं है मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना में बावड़ी का नाम Stepwell is not included in Mukhyamantri Jal Swavalamban Yojana

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Written by:
Ramesh Sharma

ramesh sharma editor smpr news

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