इंटरनेट की बढ़ती लत का प्रभाव

इंटरनेट की बढ़ती लत का प्रभाव - आज से दो दशकों पूर्व किसी ने भी इन्टरनेट के इस महत्त्व की कल्पना नहीं की होगी कि दो दशकों पश्चात मानव का जीवन और दिनचर्या इन्टरनेट के बिना चल पाना बहुत मुश्किल हो जायेगा। पिछले दो दशकों में साइंस और टेक्नोलॉजी ने बहुत ही द्रुत गति से प्रगति है।

आज के युग में ना-ना प्रकार की ऐसी चीजें उपलब्ध है जिनके बारे में कभी सोचा भी नहीं गया था। अमेरिका में इन्टरनेट का अविष्कार सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए हुआ था जो समय के साथ-साथ आमजन के लिए भी प्रयुक्त होने लग गया। आज यह हालत हो गई है कि बिना इन्टरनेट के जिन्दगी अधूरी सी लगनें लग जाती है।

आज हर क्षेत्र का डीजिटलाइजेशन होने की वजह से कंप्यूटर और इन्टरनेट का प्रयोग हर क्षेत्र में बहुत जरूरी होता जा रहा है।

इन्टरनेट की वजह से दुनिया के किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के संपर्क में रह सकता है, वह बैठे बैठे ही बस, रेलवे, सिनेमा आदि की टिकट बुक करवा सकता है, खाना आर्डर कर सकता है, कोई भी सूचना चुटकियों में प्राप्त कर सकता है।

यह सब परिवर्तन और सुविधाएँ सिर्फ और सिर्फ इन्टरनेट की ही देन है। इन्टरनेट की वजह से सारा काम बहुत आसान हो गया है, कतारों की संख्या घट रही हैं।

लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि इन्टरनेट की वजह से हमें जितनी सुविधाएँ प्राप्त हुई है उससे कहीं ज्यादा हमें नुकसान भी हो रहा है। हमें इन्टरनेट का प्रयोग सिर्फ और सिर्फ अपनी जरूरतों को पूर्ण करने के लिए ही करना चाहिए परन्तु हम लोग इसे मनोरंजन का साधन समझकर इसके गुलाम होते जा रहे हैं।

इन्टरनेट एक नशा बनता जा रहा है जिससे छुटकारा पाना बहुत मुश्किल प्रतीत हो रहा है। लोग अपना कीमती समय इन्टरनेट पर व्यर्थ ही व्यतीत कर रहे हैं और घंटों इन्टरनेट पर बिताए जा रहे हैं।

आमजन में इन्टरनेट एडिक्शन डिसऑर्डर (आई.ए.डी.) नामक मानसिक बीमारी घर करती जा रही है जिसमें इन्टरनेट की मदद से पढ़ना, लम्बे-लम्बे विडियो देखना, गेम खेलना, शौपिंग करना, ईमेल और मैसेज का आदान प्रदान करना और यहाँ तक की पोर्नोग्राफिक विडियो देखनें आदि की बुरी तरह से लत लग जाती है।

व्यक्ति इन कामों को करे बगैर रह नहीं पाता है। बहुत सी सोशल वेबसाइटों और चैटिंग अप्प्लिकेशन्स ने इसमें आग में घी का कार्य किया है जिनकी वजह से एडिक्शन में काफी ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। आजकल फेसबुक, ट्विटर, गूगल, व्हाट्सअप्प आदि ने इन्टरनेट पर एकाधिकार कर रखा है जिनके प्रभाव से बचना काफी मुश्किल होता जा रहा है।

जबसे एंड्राइड ऑपरेटिंग सिस्टम मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर के लिए आया है तब से इंसान से ज्यादा मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर स्मार्ट होने लगे हैं। स्मार्टफोन के आविष्कार ने एक क्रांति सी पैदा कर दी है जिसमे सभी नौजवान अपना भरपूर योगदान देने में जुट गए हैं।

पहले जो कार्य कंप्यूटर पर होते थे वो सभी कार्य अब स्मार्टफोन पर बखूबी होने लग गए हैं। धीरुभाई अम्बानी ने दो दशक पूर्व कहा था कि मेरा सपना है कि दुनियाँ लोगों की मुठ्ठी में हो और आज वाकई सारी दुनिया स्मार्टफोन के जरिये मुठ्ठी में है।

स्मार्टफोन की वजह से इन्टरनेट एडिक्शन में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है क्योंकि ये लाने ले जाने में आसान है और लगभग सम्पूर्ण दिन हमारे साथ रहता है। हालत यहाँ तक हो गई है कि ये अब शरीर के अंग की तरह हो गया है और हम इसे छोड़ नहीं सकते हैं।

हर कोई अलग अलग कोने में बैठा मोबाइल पर व्यस्त रहता है जिससे रिश्तों में खटास उत्पन्न होती जा रही है क्योंकि हम आपस में वक्त नहीं पा रहे हैं। हमारा सारा रिश्ता सिर्फ और सिर्फ मोबाइल के जरिये इन्टरनेट से रह गया है।

इन्टरनेट एडिक्शन की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बहुत सी जगह पर डीएडिक्शन सेन्टर भी खुलनें शुरू होने लगे हैं। इसका मतलब इन्टरनेट एडिक्शन ने हमारे जनमानस को मानसिक रूप से काफी कमजोर करना शुरू कर दिया है।

अगर समय रहते इन्टरनेट एडिक्शन को कम नहीं किया गया तो भविष्य में इसके बहुत घातक परिणाम सामने आ सकते हैं।

इंटरनेट की बढ़ती लत का प्रभाव Effect of growing Internet addiction

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