बिना जेब से पैसा खर्च किए लूट रहे हैं वाहवाही

बिना जेब से पैसा खर्च किए लूट रहे हैं वाहवाही - वैश्विक महामारी कोरोना से आज भारत के साथ-साथ सारा विश्व जूझ रहा है. भारत सरकार के साथ-साथ राजस्थान सरकार भी इस संक्रामक बीमारी से लड़ने के लिए अपने स्तर पर प्रयास कर रही है.

बिना जेब से पैसा खर्च किए लूट रहे हैं वाहवाही

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अगुवाई में राजस्थान सरकार ने इस बीमारी से लड़ने के लिए अनेक सामाजिक एवं स्वयंसेवी संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों, भामाशाहों एवं आमजन से आर्थिक सहयोग की अपील कर इसके लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष से अलग कोविड-19 राहत कोष की स्थापना की है.

सरकार की इस अपील का लोगों पर असर हुआ है और विभिन्न संस्थाओं, व्यापारियों, कर्मचारियों आदि ने अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार मुख्यमंत्री सहायता कोष में आर्थिक सहयोग देना शुरू कर दिया. सभी ने अपनी व्यक्तिगत आय में से यह सहयोग प्रदान किया है.

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यहाँ तक कि छोटे-छोटे बच्चों ने अपनी गुल्लक की जमा पूँजी भी इस आपदा से लड़ने के लिए सहयोग स्वरुप प्रदान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है.

वहीँ दूसरी तरफ हमारे माननीय सांसदों और विधायकगणों ने अपने-अपने विकास कोष से कुछ राशि इस मदद के लिए उपलब्ध करवाने के लिए जिला कलेक्टर महोदय को पत्र लिखे हैं.

गौरतलब है कि अपने क्षेत्रों में विकास कार्य करवाने के लिए सांसद एवं विधायक, सांसद क्षेत्रीय विकास कोष और विधायक क्षेत्रीय विकास कोष में से राशि खर्च करते हैं. इस कोष को निधि या कोटे के नाम से भी जाना जाता है.

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सांसद क्षेत्रीय विकास कोष में यह राशि केंद्र सरकार द्वारा एवं विधायक क्षेत्रीय विकास कोष में यह राशि राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई जाती है.

इसका मतलब जिन-जिन सांसदों एवं विधायकों ने अपने-अपने विकास कोष में से यह मदद दी है, उन्होंने अपनी जेब में से पैसा ना देकर सरकार का पैसा वापस सरकार को दिया है.

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इस प्रकार आर्थिक मदद के रूप में सरकार का पैसा पुनः सरकार को मिलने पर क्या यह सांसदों या विधायकों द्वारा आर्थिक मदद कहलाएगी? क्या इन माननीयों को व्यक्तिगत सहायता नहीं देनी चाहिए थी?

जहाँ राज्य सरकार के साथ-साथ निजी क्षेत्र के कर्मचारी भी अपने वेतन में से सहायता राशि की कटौती करवाकर सहयोग कर रहे हैं वहीं हमारे माननीय सांसद एवं विधायक बिना कोई व्यक्तिगत मदद दिए वाहवाही लूट रहे हैं.

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इस प्रकार बिना कोई व्यक्तिगत राशि खर्च किए वाहवाही लूटने पर “हींग लगे न फिटकरी रंग भी चोखा होय” वाली कहावत पूरी तरह से फिट बैठ रही है.

ऐसा नहीं है कि सभी नेतागण ही ऐसा कर रहे हैं. कुछ नेताओं ने इस निधि के साथ-साथ अपने वेतन या मानदेय में से भी राशि उपलब्ध करवाई है.

अगर सीकर जिले के सांसद और श्रीमाधोपुर, खंडेला, नीमकाथाना और दांतारामगढ़ विधानसभा क्षेत्रों की बात की जाए तो सीकर के सांसद सुमेधानंद सरस्वती ने अपने वेतन से एक लाख रूपए, दांतारामगढ़ के विधायक वीरेन्द्र सिंह ने अपने दो माह का वेतन दिया है.

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बिना जेब से पैसा खर्च किए लूट रहे हैं वाहवाही Gaining appreciation without spending personal money

Written by:
Ramesh Sharma

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