कोरोना काल में टेक्नोलॉजी का अमिट योगदान

कोरोना काल में टेक्नोलॉजी का अमिट योगदान - कोरोनावायरस से फैली वैश्विक महामारी कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन के कारण हमारे जीने का तरीका ही बदल गया। कोविड-19 ने लाइफस्टाइल और सोच में बहुत बड़ा परिवर्तन कर दिया।

लॉकडाउन के दौरान जहां लोग घर से बाहर नहीं जा सकते है, इस दौरान घर में टेक्नोलॉजी ही जीवन जीने का सहारा बनी। मोबाइल का उपयोग काफी बढ़ गया। कोरोना के अपडेट जल्द से जल्द इंटरनेट से ले रहे हैं।

सोशल मीडिया पर कभी अपने फ्रेंड से कोरोना से बचने की अपील तो कभी अपनी अनमोल यादें साझा कर रहे हैं। लॉकडाउन के कारण पूरी फैमिली साथ नहीं है तो टेक्नोलॉजी के जरिए वीडियो कॉल द्वारा अपनों से संपर्क में है।

इस दौरान टीवी पर 90 के दशक के रामायण-महाभारत के प्रसारण, मोबाइल व इंटरनेट ने घरों में रह रहे लोगों के जीवन को बेहद आसान बना दिया। टेक्नोलॉजी के यूज ने लॉकडाउन को यादगार ही नहीं बना दिया बल्कि टेक्नोलॉजी जीवन पर हावी होती नजर आई।

टेक्नोलॉजी का शुक्रिया, साथ ही कोरोना वारियर्स सॉफ्टवेयर इंजीनियर, नेटवर्क इंजीनियर व सभी आई टी प्रोफेशनल्स का शुक्रिया जिनकी वजह से लॉकडाउन में भी इंटरनेट की सुविधाएं जारी रहने से घर पर समय आसानी से गुजर गया।

कोरोना काल में टेक्नोलॉजी का अमिट योगदान

डिजिटल शिक्षा व शिक्षा वाणी नए वरदान

कोरोना वायरस के चलते घोषित लॉकडाउन के बीच शैक्षणिक संस्थानों ने इस अवधि के दौरान पाठ्यक्रमों को पूरा करने के लिए डिजिटल या ऑनलाइन शिक्षण माध्यम की ओर रुख किया है।

लॉकडाउन के चलते बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं जिसके चलते उनकी पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। इसलिए, पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए ई-लर्निंग के तहत बच्चों को पाठ्यक्रम डिजिटल उपलब्ध करवाया जा रहा है।

सरकारी स्कूल के बच्चे नई-नई टेक्नोलॉजी की मदद से पढ़ाई कर रहे हैं। राजस्थान में लॉकडाउन के दौरान राज्य के विद्यार्थियों और शिक्षकों को ऑनलाइन पठन-पाठन से जोड़े जाने के लिए प्रोजेक्ट सोशल मीडिया इंटरफेस फॉर लर्निंग एंगेजमेंट (स्माइल) की शुरुआत की गयी है।

राजस्थान के दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट की सीमित उपलब्धता व विद्यार्थियों के हित में शैक्षणिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य के साथ आकाशवाणी पर शिक्षा वाणी कार्यक्रम का प्रसारण रेडियो पर शुरू किया।

राज्य के बहुत से विद्यार्थियों के जीवन का यह पहला मौका था जब स्कूली क्लास रेडियो के माध्यम से लगाई गई। विद्यार्थियों के लिए यह नवाचार बहुत ही रोचक व ज्ञानवर्धक अनुभव रहा।

पढ़ाई के लिए बेहतर से बेहतर टेक्नोलॉजी का उपयोग कर गुणवत्तायुक्त शिक्षा मुहैया कराने के लिए हम हर संभव नवाचार कर रहे हैं।

टेक्नोलॉजी के माध्यम से शिक्षा का स्तर न सिर्फ बेहतर बल्कि बेहद रोचक और सरल भी हो जाता है कोविड-19 लॉकडाउन में सोशल मीडिया व अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर संगोष्ठी आम बात हो गई।

कोरोना नई राहें: वर्क फॉर्म होम का कल्चर हुआ शुरू

कोरोनावायरस संक्रमण काल में सोशल डिस्टेंसिंग की पालना के लिए बिना किसी परेशानी के ऑफिस का काम घर से ही शुरू हो गया और इस नई कार्य संस्कृति को नाम मिला डब्ल्यूएफएच यानी वर्क फ्रॉम होम।

अभी तक आईटी प्रोफेशनल वर्क फ्रॉम होम कर रहे थे लेकिन लॉकडाउन में सरकारी विभाग भी वर्क फ्रॉम होम कल्चर की ओर बढ़े। बिना किसी पूर्व प्रशिक्षण के सरकारी कर्मचारी भी घर से काम कर अचानक आधुनिक हो गए।

यह व्यवस्था सरकार और कर्मचारी दोनों के लिए फायदेमंद तो है ही साथ ही इसके कई अन्य लाभ भी दिखाई दिए। घर पर रहने का सुख, कार्य की स्वतंत्रता, आने जाने का समय बचता है, कर्मचारी के पेट्रोल-डीजल के खर्चे में बचत के साथ ही पर्यावरण के शुद्धिकरण में योगदान भी हुआ।

कागजी कामकाज कम होने से भी पर्यावरण को फायदा हुआ। शहरों की आबोहवा में सुधार के साथ प्रदूषण का कलंक मिटने लगा। संस्थाओं के स्थापना संबंधी खर्चों की सीधी बचत हुई।

मानव व्यवहार को जल्दी से बदलना आसान नहीं है लेकिन कोरोना वायरस ने इसे जल्द बदलने पर मजबूर कर दिया है और सरकारी विभाग भी वर्क फ्रॉम होम कल्चर को अपनाने की ओर अग्रसर हुए।

इस प्रकार संक्रमण काल ने सरकारी कार्यालयों में कामकाज की नई व्यवस्था को सफलता से स्थापित कर दिया है। इसी प्रकार जीवन शैली में मास्क, साबुन से बार-बार हाथ धोना, सैनिटाइजर व सोशल डिस्टेंसिंग ने जगह बना ली हैं।

नये तौर तरीके भले ही हो लेकिन जीवन तो चलेगा ही क्योंकि जीवन चलने का ही नाम है। यह तो प्रकृति का नियम है पतझड़ के बाद बसंत आएगा ही।

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग यानी टेक्नोलॉजी के जरिए रूबरू हुए। प्रधानमंत्री मोदी मंगलवार 12 मई को 54 दिन में पांचवीं बार देश के सामने आए व भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पांच स्तंभ की बात कहीं।

पहला पिलर- इकोनॉमी यानी अर्थव्यवस्था, दूसरा पिलर- इन्फ्रास्ट्रक्चर यानी बुनियादी ढांचा, तीसरा पिलर- सिस्टम यानी प्रणाली, चौथा पिलर- डेमोग्राफी यानी उत्साहशील आबादी व पांचवां पिलर- डिमांड यानी मांग।

इनमें एक स्तंभ सिस्टम यानी प्रणाली जो 21वीं सदी की प्रौद्योगिकी संचालित व्यवस्थाओं पर आधारित हो मतलब टेक्नोलॉजी ड्रिवन व्यवस्था की बात की।

कोरोना वायरस की वजह से हर किसी की लाइफ थम गई है और अब तो हालात यह है कि हर कोई लॉकडाउन खत्म होने का इंतजार कर रहा है।

अपनी रोजाना की लाइफ में हम ऑफिस जाने, आराम न मिलने आदि बातों से परेशान थे, लेकिन अब इन्हीं चीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

उम्मीद है कि जल्दी से जल्दी भारत समेत सभी देशों से कोरोना वायरस का अंत हो जाए और हमारी जिंदगी फिर से पटरी पर लौट आए।

कोरोना काल में टेक्नोलॉजी का अमिट योगदान Indelible contribution of technology in Corona era

Written by:
अमित जोशी
सॉफ्टवेयर इंजीनियर, श्रीमाधोपुर (सीकर)

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